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देवदूत बन गए पंकज यादव

जिसकी सूझबूझ से बच गई कई जानें

बाइक सवार से लिफ्ट ली, ट्रक चालक को पत्थर मारा, सिग्नल से पहले जैसे तैसे रुकवाया ट्रक

इंदौर से वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की रिपोर्ट

मैंने किसी पुरस्कार के लिये काम नहीं किया। मैं तो अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा था। मुझे पता था यदि बड़ा गणपति चौराहा सिग्नल से पहले ट्रक नहीं रुकवाता तो जाने कितने लोग उसकी चपेट में आ जाते। यह कहना है यातायात आरक्षक पंकज यादव का, जो वायरलेस तिराहे पर ड्यूटी पर तैनात थे और एक बाइक सवार युवक से लिफ्ट लेकर ट्रक चालक का पीछा कर रहे थे।
जिस ट्रैफिक पुलिस पर नाकामी के आरोप लग रहे हैं उसी विभाग के इस हीरो पंकज ने ‘प्रजातंत्र’ से चर्चा में कहा इस चौराहे से जैसे ही ट्रक गुजरा मुझे उसकी स्पीड देखकर गड़बड़ी का अंदेशा हो गया। एक बाइक सवार युवक की गाड़ी के पीछे बैठा और ट्रक को ओवरटेक करने के लिए बाइक भगाने को कहा। हम दोनों चिल्लाते जा रहे थे हट जाओ, ट्रक से दूर रहो। उस ट्रक के अगले पहियों में एक बाइक फँसी हुई थी।
कालानी नगर की ओर से तेज़ रफ्तार से आ रहा ट्रक कई वाहनों को टक्कर मारते हुए बड़ा गणपति की ओर बढ़ रहा था। ट्रक को ओवरटेक कर चालक को धीमा करने का संकेत दिया, उसे पत्थर भी मारा कि ध्यान तो दे लेकिन चालक ने स्पीड कम नहीं की, तो मैंने अन्य बाइक सवारों को कहा कि आगे के चौराहे पर लोगों को सचेत करने और ट्रक के आगे से ट्रैफिक हटाने के लिए वाहन चालकों को सचेत करें।
ट्रक की गति बड़ा गणपति सिग्नल से पहले कुछ धीमी हुई तो यादव ने अदम्य साहस दिखाते हुए चलते ट्रक पर चढ़ने का प्रयास किया। राहगीरों की मदद से वह क्लीनर की ओर से ट्रक में पहुँचे और दूसरी ओर से दरवाज़ा खोलकर चालक को खींचकर नीचे उतारा और दूर लेकर गए, इसी बीच नीचे फँसी और घिसटती आ रही बाइक में आग लग गई, वह युवक (मृतक कैलाश जोशी) भी आग में घिर गया और ट्रक ने भी आग पकड़ ली।
ट्रैफिक आरक्षक पंकज यादव सूझबूझ और हिम्मत नहीं दिखाते, ट्रक को नियंत्रित कर नहीं रोकते तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था, कई वाहन और लोग इसकी चपेट में आ जाते। क्षेत्र के उन लोगों का साहस भी सराहनीय है जो जलते ट्रक में फंसे कैलाश जोशी को निकालने, जान पर खेलते रहे। कई अनाम वो लोग भी जो ट्रक के पीछे, साइड में भागते-चिल्लाते वाहन चालकों को ट्रक से दूर रहने के लिए सतर्क कर रहे थे।
“मेरे दिमाग में एक ही चीज चल रही थी जैसे भी हो, कैसे भी चौराहे से पहले ट्रक को रोक लें”
ट्रैफिक आरक्षक (पश्चिम) पंकज यादव (3689) से जब पूछा उस वक्त मन में क्या चल रहा था? पंकज का कहना था जिस तरह से वो ट्रक भगा रहा था, मन में यही था कि कैसे भी रोकूँ इसे। उस बाइक सवार युवक का तो मुझे नाम भी पता नहीं लेकिन उसने सहयोग किया। मैंने अपने विभाग और ड्यूटी के प्रति एक पुलिसवाला होने का अपना फ़र्ज़ निभाया। किसी सम्मान-पुरस्कार के लिये नहीं किया। विभागीय अधिकारियों ने पीठ थपथपाई, मेरी पत्नी-बच्चों ने मेरी सराहना कर दी इससे बड़ा सम्मान क्या होगा।

नो एंट्री वाले रोड पर ट्रक आया कैसे
आख़िर नो एंट्री में वो हत्यारा ट्रक एयरपोर्ट रोड से बड़ा गणपति चौराहे तक आ कैसे गया? यह प्रश्न हर आदमी का है ? अपने स्तर पर जो जानकारी जुटाई है उसमें इस प्रश्न का जवाब मिला है।
एयरपोर्ट पर बोहरा समाज के धर्मगुरु के आगमन और उनके दीदार के लिये उमड़े हजारों समाजजनों के इंतजाम में करीब 300 पुलिस-ट्रैफिक जवानों को तैनात किया गया था। शाम 5 बजे के करीब यह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ तो इंतजाम में लगा यह अमला भोजन के लिए घरों को लौटा। बस इसी बीच वो चालक ट्रक लेकर नो एंट्री वाले रोड पर आ गया और आगे बढ़ता गया। चालक चूँकि बेहद नशे में था गाड़ियों को चपेट में लेने, वाहन चालकों को निशाना बनाने, लोगों द्वारा मचाए शोर आदि को अनसुना करते हुए वो आगे बढ़ता गया।यह तो अच्छा हुआ कि बड़ा गणपति चौराहा सिग्नल से पहले उसकी गति थम गई वरना सिग्नल पर रुके जाने कितने लोग उस ट्रक की बलि चढ़ जाते।

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