ख़त : सैनिकों के नाम

सीमाओं पर खड़ा सैनिक सिर्फ़ बंदूक नहीं थामे होता, वह अपने घर, अपने बच्चों की हँसी और माता-पिता की आँखों की प्रतीक्षा भी वहीं छोड़ आता है। सर्दी, गर्मी और बरसात उसके लिए मौसम नहीं, कर्तव्य की परीक्षा होते हैं। देश की शान उसके कदमों में और भारत की नींद उसकी आँखों की जाग में सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि हर दुआ, हर नमन और हर उम्मीद सबसे पहले उसी के नाम लिखी जाती है।

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देवदूत बन गए पंकज यादव

ट्रैफिक आरक्षक पंकज यादव ने अपने कर्तव्य के प्रति अदम्य साहस दिखाते हुए कालानी नगर से तेज़ रफ्तार ट्रक को बड़ा गणपति सिग्नल तक रोकने की कोशिश की। ट्रक के नीचे फँसी बाइक और उसमें सवार युवक की जान खतरे में थी, लेकिन यादव और राहगीरों की सूझबूझ ने बड़े हादसे को टाल दिया।

यादव कहते हैं, “मैंने किसी पुरस्कार के लिए नहीं किया, बस ड्यूटी निभाई। मेरा मन यही सोच रहा था कि ट्रक को कैसे भी रोकूं।’’इस घटना में उनकी हिम्मत और आसपास के लोगों की तत्परता ने कई जानें बचाईं और सच्चे साहस की कहानी पेश की।

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