फ़िज़ा गुलज़ार हो उठी
गरीबी और संघर्षों के बीच पली शगुन ने मेहनत के दम पर अपने माता-पिता के लिए सपनों का घर बनाया. लेकिन प्रेम और विवाह के सवाल पर उसका मन अब भी उलझा हुआ था. एक घटना ने उसके रिश्ते को नई दिशा दे दी.

गरीबी और संघर्षों के बीच पली शगुन ने मेहनत के दम पर अपने माता-पिता के लिए सपनों का घर बनाया. लेकिन प्रेम और विवाह के सवाल पर उसका मन अब भी उलझा हुआ था. एक घटना ने उसके रिश्ते को नई दिशा दे दी.
त्रिमूर्ति हाई स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह और देशभक्ति के साथ आयोजित हुआ. विद्यार्थियों ने गीत, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया.
स्वतंत्रता हर व्यक्ति की मूल आकांक्षा है, लेकिन इसकी अपनी एक सीमा और जिम्मेदारी भी होती है. यह लेख आजादी, रिश्तों, विचारों की स्वतंत्रता और ‘जिएँ और जीने दें’ के मानवीय संदेश पर विचार करता है.
स्वतंत्रता की रागिनी’ भारत की स्वतंत्रता, प्रकृति की सुंदरता और तिरंगे के गौरव का भावपूर्ण काव्य-गान है. कविता मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भारत की यश-कीर्ति को युगों तक जीवित रखने की भावना व्यक्त करती है.
पंद्रह अगस्त पर देशभक्ति के जश्न के बीच यह कविता एक जरूरी सवाल उठाती है—क्या केवल एक दिन तिरंगा लहराना ही देशभक्ति है? कविता स्वच्छता, एकता, भाईचारे और मातृभूमि के प्रति जिम्मेदारी को सच्ची देशभक्ति का आधार बताती है.
बचपन से शब्दों से जुड़ी लेखिका ने परिवार और जिम्मेदारियों के बीच अपनी रचनात्मक पहचान बनाई. ‘कुमकुम लगे पाँव’ उनके साहित्यिक सफर और स्त्री जीवन के विविध रंगों की संवेदनशील अभिव्यक्ति है.
आज़ादी के जश्न, तिरंगे और देशभक्ति के नारों के बीच यह रचना आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों और सामाजिक विडंबनाओं का मार्मिक चित्र प्रस्तुत करती है.
महिदपुर रोड के राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने राग-द्वेष से मुक्त होने, मैत्री भाव अपनाने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया.
माटी से माटी के नाते पर सवाल उठाता मन, पथराई आँखों में छिपी पीड़ा और भीतर सुलगते अहसासों को यह कविता संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है.
यह कविता उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. उनके शौर्य, त्याग और अमर बलिदान को समर्पित भावपूर्ण रचना.