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इंदौर में साहित्यिक सम्मान प्राप्त करती कवयित्री, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन की आध्यात्मिक यात्रा

शब्दों की साधना, शिव की आराधना

साहित्यिक सम्मान, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन तथा इंदौर की सांस्कृतिक समृद्धि से सजी यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार आध्यात्मिक और साहित्यिक उपलब्धियों में से एक बन गई।

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मसूरी में हनीमून के दौरान 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की संदिग्ध मौत, कमरे से मिले खून के निशान

मसूरी में हनीमून के दौरान 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला की संदिग्ध मौत

मसूरी के एक होमस्टे में हनीमून पर गई 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पी. राधा गायत्री की संदिग्ध मौत. कमरे से खून के निशान, शराब की बोतलें बरामद, पुलिस जांच जारी.

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दो छोटी सहेलियाँ एक-दूसरे का हाथ थामे मुस्कुराती हुईं, सच्ची दोस्ती, विश्वास और अपनत्व का भावनात्मक दृश्य।

सच्चे दोस्त

कुक्कू को लगता था कि झिलमिल हर बात पर उसे रोकती-टोकती है, लेकिन एक घटना ने उसे सच्ची दोस्ती का असली अर्थ समझा दिया। यह प्रेरणादायक बाल कहानी मित्रता, विश्वास और साथ निभाने के मूल्य को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है।

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जीवन के कठिन मार्ग पर अकेला चलता एक व्यक्ति, चारों ओर घना जंगल और पथरीला रास्ता, संघर्ष और आत्मचिंतन का प्रतीकात्मक दृश्य।

ज़िंदगी

ज़िंदगी जितनी सरल दिखाई देती है, उतनी होती नहीं। यह कविता जीवन के संघर्ष, रिश्तों की बदलती परिभाषा, मोह-माया और मानव अनुभवों की गहराइयों को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है।

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रसोई में काम करती एक भारतीय माँ, चेहरे पर थकान के बावजूद संतोष और ममता की मुस्कान, परिवार के प्रति समर्पण और त्याग को दर्शाता भावनात्मक दृश्य।

माँ होना ही कठिन लगा

माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।

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अलमारी में टंगे रंग-बिरंगे लेहंगे को देखती एक भारतीय महिला, शादी और पारिवारिक यादों में खोई हुई, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य।

रिश्ते

खुश्बू गोयल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) वो लेहंगा, जो भैया की शादी में लिया था,उसकी भी बड़ी अजीब कहानी है। जब भी अलमारी खोलूँ,माँ को बस वही नज़र आता है,और हर बार की तरहउनका कहना शुरू हो जाता है “इतना भारी लेहंगा क्यों लिया था,जब तुझे पहनना ही नहीं था?” बस एक बार भैया की शादी…

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भव्य बंगले में जन्मदिन समारोह के बाद अकेली बैठी एक महिला, जिसके पास उसकी बहू सहानुभूति से बैठी है, रिश्तों और मानवता का भावनात्मक दृश्य।

सुनहरी ज़ंजीरें

मुंबई के पॉश इलाके में समुद्र के किनारे बना “रत्नालय” दूर से किसी महल जैसा दिखाई देता था। ऊँची दीवारें, चमचमाती काँच की खिड़कियाँ, विदेशी गाड़ियाँ और हर समय आने-जाने वाले लोगों की भीड़—ये सब कुछ उस आलीशान घर की हैसियत बयान करती थीं।

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सूखती नदी, पहाड़ों और चंद्रमा के बीच मौन खड़ा एक चिंतनशील व्यक्ति, जो समाज की आंतरिक विसंगतियों को देख रहा है।

वातावरण

यह कविता प्रकृति की स्थिरता और मनुष्य की कृत्रिमता के बीच के गहरे विरोधाभास को उजागर करती है। हँसी के पीछे छिपी पीड़ा, अभिनय और आंतरिक तनाव को रेखांकित करती यह रचना मौन की उस शक्ति को सामने लाती है, जो कभी-कभी शब्दों से कहीं अधिक मुखर होती है।

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मैली चुनरिया ओढ़े ग्रामीण भारतीय महिला आत्मचिंतन और पश्चाताप की भावपूर्ण अवस्था में खड़ी हुई।

चुनरिया हो गई मैली रे…

“चुनरिया हो गई मैली रे” एक भावपूर्ण कविता है जो जीवन के संस्कारों, मोह-माया, आत्मग्लानि और नैतिक चेतना का मार्मिक चित्रण करती है। पढ़ें यह संवेदनशील काव्य रचना।

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पुरानी पुस्तकों, पांडुलिपियों और शब्दों के प्रतीकों के बीच विचारमग्न साहित्यकार का कलात्मक दृश्य, जो भाषा, समय और संस्कृति के गहरे संबंध को दर्शाता है।

लफ़्ज़ों की नसों में बहता हुआ वक़्त

प्रो. डॉ. मनु की कविता “लफ़्ज़ों की नसों में बहता हुआ वक़्त” शब्दों, अर्थों और उनकी ऐतिहासिक जड़ों की एक गहन साहित्यिक यात्रा है। यह रचना बताती है कि हर लफ़्ज़ अपने भीतर समय, संस्कृति और मानवीय अनुभवों का एक पूरा संसार समेटे रहता है।

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