
नलिनी श्रीवास्तव “नील“
कोरा-सा था मेरा जीवन,
तुमने कितने ही रंग भरे।
हर अक्षर को दी पहचान,
सतरंगे सपनों को मेरे।
मेरे मन की हर आहट को
तुमने ही पहचाना था,
कब-कब मैं उदास रही
ये बस तुमने ही जाना था।
सपने बुनने की आदत थी,
पर उन्हें पूरा करना मेरे वश में न था,
जब तुमको यह पता चला,
तुमने सपनों को पंख दे दिए मेरे।
बसते हो तुम मेरी आत्मा में,
हर साँस में तेरी चाहत है,
यह चाहत इतनी गहरी है
रग-रग में तुम ही बहते हो।
कोरे पन्नों पर अपने रंग से
हर बार नया कुछ लिखते हो,
इन रंगों और शब्दों से
बनती जा रही हूँ इक किताब…!
लेखिका के बारे में
नलिनी श्रीवास्तव ‘नील’
हिंदी साहित्य की संवेदनशील और सशक्त हस्ताक्षर, जिनकी लेखनी भावनाओं की गहराई और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को सहजता से शब्दों में पिरोती है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरती लखनऊ में जन्मी नलिनी जी ने प्रारंभ से ही साहित्य के प्रति विशेष रुचि विकसित की। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक (बी.ए.) तथा अवध विश्वविद्यालय, फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में अयोध्या को अपना स्थायी निवास बनाते हुए, नई दिल्ली और पुणे जैसे महानगरों में प्रवास के अनुभवों ने उनके लेखन को और अधिक व्यापक दृष्टि और विविधता प्रदान की है। ‘नील’ नाम से लेखन करने वाली नलिनी श्रीवास्तव की रचनाओं में प्रेम, संवेदना, आत्मिक जुड़ाव और जीवन की सूक्ष्म भावनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उनकी लेखनी पाठकों के मन को छूने के साथ-साथ उन्हें आत्मचिंतन के लिए भी प्रेरित करती है।
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