Romantic Poem
जब तुम आओ…
जब कोई मिलने आए, तो वह अधूरा नहीं, पूरा होकर आए—यही इस कविता का मूल भाव है। यह रचना बताती है कि आधे मन और बंटी हुई भावनाओं के साथ सच्चा समर्पण संभव नहीं होता। प्रेम तभी पूर्ण होता है, जब उसमें किसी प्रकार की कमी या विभाजन न हो।
मैं इक किताब…
हम सबके भीतर एक कोरा पन्ना होता है, जिस पर समय और अनुभव धीरे-धीरे अपने रंग भरते हैं। इन्हीं रंगों से जीवन की कहानी बनती है. कभी खुशी, कभी अधूरी इच्छाओं के साथ। अंततः यही भावनाएँ हमें एक ऐसी किताब में बदल देती हैं, जिसे हम जीते भी हैं और समझते भी हैं।
