कब तक चलेगा ये सिलसिला…
प्रेम, दूरी और अधूरे जज़्बातों से सजी यह हिंदी कविता रिश्तों की खामोशियों, तड़प और अनकही बातों का भावपूर्ण चित्रण करती है।

प्रेम, दूरी और अधूरे जज़्बातों से सजी यह हिंदी कविता रिश्तों की खामोशियों, तड़प और अनकही बातों का भावपूर्ण चित्रण करती है।
हम सबके भीतर एक कोरा पन्ना होता है, जिस पर समय और अनुभव धीरे-धीरे अपने रंग भरते हैं। इन्हीं रंगों से जीवन की कहानी बनती है. कभी खुशी, कभी अधूरी इच्छाओं के साथ। अंततः यही भावनाएँ हमें एक ऐसी किताब में बदल देती हैं, जिसे हम जीते भी हैं और समझते भी हैं।
यह कविता एक ऐसी सरल और संवेदनशील लड़की का चित्र खींचती है, जो बहुत कम चाहतों में भी खुश रहना जानती है। उसे बस थोड़ा सा प्यार और देखभाल चाहिए, और बदले में वह अपने स्नेह और समर्पण से जीवन को फूलों सा सजा देती है। वह बोगनवेलिया की तरह है नाज़ुक भी, मगर भीतर से बेहद मजबूत। चाहे परिस्थितियाँ उसे काटें-छांटें, वह बिना शिकायत खामोशी से अपने प्रेम और मासूमियत को बनाए रखती है।
यह कविता उस प्रेम की है जहाँ साथी केवल जीवन का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का श्रृंगार बन जाता है। मेंहदी की खुशबू, चूड़ियों की खनक और पायल की रुनझुन सब उसी के स्पर्श से अर्थ पाते हैं। सुख–दुख में साथ निभाने वाले प्रेम के उस रूप को यह पंक्तियाँ समर्पित हैं, जो मोह-माया से परे होकर भी दिल पर अपना गहरा रंग छोड़ जाता है. जैसे आत्मा का श्रृंगार।
जरा जरा तू हमसे मिल, तनिक तनिक उतर मेरे दिल…” यह कविता प्रेम के उन कोमल एहसासों को छूती है, जहाँ शब्द कम और नजरों की भाषा ज़्यादा बोलती है। मिलन की चाह, दिल की तड़प और अनकहे जज़्बातों को बेहद खूबसूरती से पिरोती यह रचना पाठक के मन में एक मधुर रोमांटिक लहर जगा देती है।