चांदनी रात में समुद्र किनारे खड़ा एक अकेला व्यक्ति क्षितिज की ओर देख रहा है। किनारे से टकराती लहरें, गीली रेत पर पदचिह्न और शांत वातावरण प्रेम, यादों और विरह की भावनाओं को दर्शा रहे हैं।

लहरों सी मेरी यादें…

कुछ यादें समंदर की लहरों जैसी होती हैं। वे बार-बार दिल के किनारे से टकराती हैं और किसी अपने का नाम फिर से लिख जाती हैं। यह कविता प्रेम, विरह और उन यादों की कहानी है, जो समय बीत जाने के बाद भी दिल में जीवित रहती हैं।

Read More
सिंदूर से रक्त तक: बदलते रिश्तों पर एक मार्मिक कविता

चरित्र का हनन

प्रेम, विश्वास और रिश्तों की डोर जब छल और स्वार्थ के बोझ तले टूट जाती है, तब केवल दो दिल नहीं बिखरते, बल्कि कई परिवारों की खुशियाँ भी उजड़ जाती हैं। ‘चरित्र का हनन’ कविता आधुनिक समाज में बदलती मानसिकता, विश्वासघात और संवेदनाओं के क्षरण पर एक मार्मिक प्रहार है।

Read More
भारतीय नारी के विभिन्न रूपों—बेटी, पत्नी और माँ—को दर्शाता एक प्रेरणादायक चित्र, जो स्त्री शक्ति, मातृत्व और गरिमा का प्रतीक है।

नारी, तुम नारायणी…

नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।

Read More
सूखी नदी, कूड़े के पहाड़ और प्लास्टिक से ढके शहर को देखते हुए एक लेखिका डायरी में लिखती हुई, पर्यावरणीय चिंता और संवेदनशीलता को दर्शाता दृश्य।

मैं लिखूँ

जब प्रकृति घायल हो, नदियाँ सूख जाएँ, शहर प्लास्टिक से ढक जाएँ और चारों ओर पर्यावरणीय संकट दिखाई दे, तब संवेदनशील मन चुप नहीं रह पाता। ‘मैं लिखूँ’ कविता उसी बेचैनी, जिम्मेदारी और परिवर्तन की उम्मीद का सशक्त स्वर है।

Read More
आईने के सामने खड़ी एक भारतीय महिला, जो परिवार की जिम्मेदारियों के बीच स्वयं की पहचान और आत्ममंथन में खोई हुई दिखाई दे रही है।

स्त्री : एक मुलाकात

‘स्त्री – एक मुलाकात’ एक मार्मिक कविता है, जो उस स्त्री की कहानी कहती है जो परिवार, बच्चों और जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते स्वयं से दूर हो जाती है। यह कविता स्त्री के त्याग, उसकी अनदेखी इच्छाओं और अपनी पहचान से पुनः मिलने की आकांक्षा को संवेदनशीलता से व्यक्त करती है।

Read More
डूबते सूरज के बीच एक सुनसान रास्ते पर खड़ा व्यक्ति, बीते समय और छूटे लोगों को याद करते हुए।

वक्त का पहिया…

वक्त लौटकर आता हुआ दिखाई देता है, लेकिन उसके साथ बिछड़े लोग और बीते पल कभी वापस नहीं आते। ‘वक्त का पहिया’ समय, स्मृतियों और जीवन में आए बदलावों पर आधारित एक गहरी और भावुक हिंदी कविता है, जो पाठक को अपने अतीत से रूबरू कराती है।

Read More
वृद्ध माता-पिता की सूनी आँखें अपने बच्चों की राह निहारते हुए – माता-पिता की उपेक्षा और अकेलेपन पर भावपूर्ण हिंदी कविता।

सूनी आँखें

सूनी आँखें” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो वृद्ध माता-पिता के अकेलेपन, उपेक्षा और उनके मन में अपने बच्चों के प्रति अटूट प्रेम को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म और सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है

Read More
भीड़भाड़ वाली सड़क पर शाम के समय अकेला चलता एक भारतीय व्यक्ति, जिसके चेहरे पर गहरी सोच और तन्हाई झलक रही है। उसके आसपास लोग अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त हैं, जबकि वह सच और इंसानियत के रास्ते पर अकेला खड़ा दिखाई देता है।

दुनिया की दुनियादारी

यह कविता उस इंसान की आवाज़ है जो झूठ और स्वार्थ से भरी दुनिया में भी सच, संवेदना और इंसानियत को बचाए रखने की कोशिश करता है। तन्हाई, संघर्ष और उम्मीद के बीच जीवन का सच्चा चेहरा दिखाती एक मार्मिक रचना।

Read More
युद्ध और उसके परिणामों पर चिंतन को दर्शाता एक प्रतीकात्मक दृश्य, जिसमें धुएँ और विनाश के बीच खड़ा एक अकेला व्यक्ति संघर्ष और मानवता पर विचार कर रहा है।

युद्ध की समझ…

युद्ध कोई नहीं चाहता, फिर भी इतिहास गवाह है कि कई बार परिस्थितियाँ और अन्याय ऐसे मोड़ पर ले आते हैं, जहाँ संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है। यह कविता युद्ध के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि उसकी समझ विकसित करने का प्रयास है।

Read More
द्ध और प्रदूषण के कारण उठता काला धुआँ, जो आसमान को ढकते हुए विनाश और पर्यावरण संकट का प्रतीक बन गया है।

मैं हूँ धुआँ…

यह कविता धुएँ को एक दैत्याकार शक्ति के रूप में चित्रित करती है, जो युद्ध, बम, मिसाइलों और आग से जन्म लेकर पूरे वातावरण को विषाक्त कर देना चाहती है। यह केवल प्रदूषण की नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के आत्मविनाश की कहानी भी है।

Read More