युद्ध की अरगनी टटोलता स्त्री का प्रेम
युद्ध की भयावहता के बीच एक स्त्री का मन प्रेम, विश्वास और शांति का स्वप्न संजोए रहता है। यह कविता हिंसा के विरुद्ध मानवीय करुणा, सोलह शृंगार की कोमलता और एक नए उजास भरे युग की आकांक्षा को बेहद संवेदनशील ढंग से व्यक्त करती है।
