सच्ची लगन

आँगन में खड़ी बेटी को प्रेम और आशीर्वाद देते माता-पिता का भावनात्मक दृश्य।

अर्चना ज्ञानी, उज्जैन

कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास से
उच्च शिखर पर बढ़ती रहो।

अपनी लक्ष्मण-रेखा
स्वयं खींचकर,
मान-सम्मान की गरिमामयी
घृत-दीपज्योति बनो।

पवित्र आँगन की श्याम तुलसी,
चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित,
सागर-सी गंभीरता,
आकाश-सी विशालता लिए,
नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो।

मेरे आँगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली-सी
सदा तुम दमकती रहो।
मेरे पावन संस्कारों में पली,
चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए,
सदा तुम चहकती रहो।

माँ गौरी का केशर-चंदन
और भस्मी बाबा भोलेनाथ के
सुखद आशीषों से
हमेशा सराबोर रहो।

रिमझिम सावन की मधुर फुहारों से
निशिदिन भीगती रहो।
माता-पिता के आत्मसम्मान की रजनीगंधा बन,
मेरे मन की क्यारी में
रोज-रोज महकती रहो…

मेरी बेटी, सदा तुम खुश रहो…!

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