आँगन में खड़ी बेटी को प्रेम और आशीर्वाद देते माता-पिता का भावनात्मक दृश्य।

सच्ची लगन

अर्चना ज्ञानी, उज्जैन कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास सेउच्च शिखर पर बढ़ती रहो। अपनी लक्ष्मण-रेखास्वयं खींचकर,मान-सम्मान की गरिमामयीघृत-दीपज्योति बनो। पवित्र आँगन की श्याम तुलसी,चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित,सागर-सी गंभीरता,आकाश-सी विशालता लिए,नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो। मेरे आँगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली-सीसदा तुम दमकती रहो।मेरे पावन संस्कारों में पली,चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए,सदा तुम चहकती रहो। माँ…

Read More
न्याय और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक रूप में शहर की सड़क पर तलवार उठाए दृढ़ संकल्पित भारतीय महिला, पीछे नाटकीय आकाश और उजाला।

तलवार उठाना होगा

“तलवार उठाना होगा” एक ओजपूर्ण हिंदी कविता है जो बेटी, बहन, पत्नी और नारी के विविध रूपों का सम्मान करते हुए समाज में बढ़ते अत्याचारों के विरुद्ध जागरूकता और संघर्ष का संदेश देती है।

Read More