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पिता की उंगली पकड़कर चलती छोटी बेटी

बेटी

बेटी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि दो परिवारों की खुशियों, संस्कारों और सम्मान की पहचान होती है। यह भावपूर्ण हिंदी कविता बेटी के जन्म से लेकर उसके जीवन के विभिन्न पड़ावों तक के भावों को संवेदनशीलता से व्यक्त करती है। कविता बताती है कि बेटी ईश्वर का आशीर्वाद, घर की रौनक और माता-पिता के जीवन की सबसे अनमोल सौगात होती है। यह रचना बेटी के सम्मान, स्नेह और उसके महत्व को समर्पित है।

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अपनी बिटिया को स्नेह से गोद में लिए एक भारतीय माँ का भावपूर्ण दृश्य

बिटिया

“बिटिया” एक भावपूर्ण कविता है जो बेटी के जन्म से लेकर उसके प्रेम, विश्वास और जीवन में उसके अमूल्य स्थान को शब्द देती है। यह रचना बेटियों को ईश्वर का अनुपम उपहार मानते हुए उनके प्रति सम्मान, स्नेह और गर्व की भावना व्यक्त करती है।

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आँगन में खड़ी बेटी को प्रेम और आशीर्वाद देते माता-पिता का भावनात्मक दृश्य।

सच्ची लगन

अर्चना ज्ञानी, उज्जैन कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास सेउच्च शिखर पर बढ़ती रहो। अपनी लक्ष्मण-रेखास्वयं खींचकर,मान-सम्मान की गरिमामयीघृत-दीपज्योति बनो। पवित्र आँगन की श्याम तुलसी,चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित,सागर-सी गंभीरता,आकाश-सी विशालता लिए,नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो। मेरे आँगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली-सीसदा तुम दमकती रहो।मेरे पावन संस्कारों में पली,चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए,सदा तुम चहकती रहो। माँ…

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न्याय और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक रूप में शहर की सड़क पर तलवार उठाए दृढ़ संकल्पित भारतीय महिला, पीछे नाटकीय आकाश और उजाला।

तलवार उठाना होगा

“तलवार उठाना होगा” एक ओजपूर्ण हिंदी कविता है जो बेटी, बहन, पत्नी और नारी के विविध रूपों का सम्मान करते हुए समाज में बढ़ते अत्याचारों के विरुद्ध जागरूकता और संघर्ष का संदेश देती है।

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