चुप्पी, अविश्वास और यौन उत्पीड़न पर आधारित मार्मिक हिंदी कहानी 'उलझन'

उलझन

‘उलझन’ एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जिसमें एक युवती अपने जीजा की गलत हरकतों का शिकार होती है। चुप्पी और गलतफ़हमी उसे अपराधी बना देती है। यह कहानी बताती है कि हर दिखाई देने वाला सच, वास्तव में सच नहीं होता और समय पर आवाज़ उठाना कितना आवश्यक है।

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सीता चाहिए, तो राम भी बनो

यह कविता समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, एसिड अटैक, महिलाओं के प्रति हिंसा और दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रश्न उठाती है। साथ ही यह पुरुषों को राम और कृष्ण जैसे आदर्शों का अनुसरण कर नारी सम्मान की रक्षा करने का संदेश देती है।

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भारतीय नारी का नारायणी स्वरूप दर्शाती प्रेरणादायक कलात्मक छवि, शक्ति, ममता और आत्मविश्वास का प्रतीक

नारी तू! नारायणी स्वरूपा

नारी केवल एक संबंध नहीं, बल्कि ममता, त्याग, साहस, करुणा और शक्ति का अद्भुत संगम है। “नारी तू! नारायणी स्वरूपा” कविता स्त्री के विविध रूपों और उसके अतुलनीय योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन करती है।

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अपनी बिटिया को स्नेह से गोद में लिए एक भारतीय माँ का भावपूर्ण दृश्य

बिटिया

“बिटिया” एक भावपूर्ण कविता है जो बेटी के जन्म से लेकर उसके प्रेम, विश्वास और जीवन में उसके अमूल्य स्थान को शब्द देती है। यह रचना बेटियों को ईश्वर का अनुपम उपहार मानते हुए उनके प्रति सम्मान, स्नेह और गर्व की भावना व्यक्त करती है।

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नारी केवल शब्द नहीं, मानवता की पहचान है |

नारी

नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि ममता, त्याग, साहस, धैर्य और मानवता की पहचान है। यह कविता नारी के विविध रूपों और उसके अमूल्य योगदान को समर्पित है।

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आँगन में खड़ी बेटी को प्रेम और आशीर्वाद देते माता-पिता का भावनात्मक दृश्य।

सच्ची लगन

अर्चना ज्ञानी, उज्जैन कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास सेउच्च शिखर पर बढ़ती रहो। अपनी लक्ष्मण-रेखास्वयं खींचकर,मान-सम्मान की गरिमामयीघृत-दीपज्योति बनो। पवित्र आँगन की श्याम तुलसी,चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित,सागर-सी गंभीरता,आकाश-सी विशालता लिए,नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो। मेरे आँगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली-सीसदा तुम दमकती रहो।मेरे पावन संस्कारों में पली,चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए,सदा तुम चहकती रहो। माँ…

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नारी शक्ति, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती प्रेरक हिंदी कविता की यथार्थवादी छवि।

“नारी केवल देह नहीं”

नारी केवल देह नहीं” नारी के अस्तित्व, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक गौरव पर आधारित एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है। यह रचना नारी को केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि त्याग, ममता, शक्ति और संस्कृति की वाहक के रूप में देखने का संदेश देती है।

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महाभारत सभा में द्रौपदी श्रीकृष्ण को पुकारती हुई, दुशासन चीरहरण का प्रयास करता है, दिव्य प्रकाश से अनंत वस्त्र प्रकट होते हैं और सभा मौन खड़ी है।

हे गोविंद! मेरी लाज बचाओ

द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग पर आधारित यह मार्मिक कविता नारी सम्मान, अन्याय के विरुद्ध पुकार और श्रीकृष्ण की दिव्य रक्षा का भावपूर्ण चित्रण करती है।

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ग्रामीण बस स्टैंड पर डरी हुई स्कूल गर्ल, महिला सुरक्षा और शिक्षा पर सवाल

स्वाभिमान का खून

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा क्या सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है? यह लेख बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान की जमीनी सच्चाई को उजागर करता है।

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द्रौपदी–कृष्ण संवाद: “विश्वास का वस्त्र

द्रौपदी–कृष्ण संवाद

द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।

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