नारी, तुम नारायणी…

भारतीय नारी के विभिन्न रूपों—बेटी, पत्नी और माँ—को दर्शाता एक प्रेरणादायक चित्र, जो स्त्री शक्ति, मातृत्व और गरिमा का प्रतीक है।

चेतना सिंह, पुत्री- श्री शुभ नारायण सिंह; छपरा (बिहार)

नारी, तुम नारायणी हो,
जीवन की निर्झर बहता पानी हो।

पैरों में पिता की बंदिशें,
पति के लिए समर्पित जवानी हो।

माँ बनकर वात्सल्य-प्रेम,
ईश्वर की दी वरदानी हो।

न डर किसी का, न अहित किसी का,
प्रकृति की अद्भुत कहानी हो।

न थकी कभी, न झुकी कभी,
सृष्टि की अद्भुत सियानी हो।

भरोसा तुम, विश्वास भी तुम,
पर्वत-सी अटल, चट्टानी हो।

सुनो, नारी! तुम नारायणी हो…।

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