Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

नारी, तुम नारायणी…

भारतीय नारी के विभिन्न रूपों—बेटी, पत्नी और माँ—को दर्शाता एक प्रेरणादायक चित्र, जो स्त्री शक्ति, मातृत्व और गरिमा का प्रतीक है।

चेतना सिंह, पुत्री- श्री शुभ नारायण सिंह; छपरा (बिहार)

नारी, तुम नारायणी हो,
जीवन की निर्झर बहता पानी हो।

पैरों में पिता की बंदिशें,
पति के लिए समर्पित जवानी हो।

माँ बनकर वात्सल्य-प्रेम,
ईश्वर की दी वरदानी हो।

न डर किसी का, न अहित किसी का,
प्रकृति की अद्भुत कहानी हो।

न थकी कभी, न झुकी कभी,
सृष्टि की अद्भुत सियानी हो।

भरोसा तुम, विश्वास भी तुम,
पर्वत-सी अटल, चट्टानी हो।

सुनो, नारी! तुम नारायणी हो…।

इन रचनाओं को अवश्य पढ़ें-

पुनर्मिलन
उसने कहा…
मैं लिखूँ
स्त्री : एक मुलाकात
नीली जुबान….!
गुलमोहर और रजनीगंधा
अधूरी बातें…
पराया मायका

5 thoughts on “नारी, तुम नारायणी…

    1. बहुत बहुत आभार और धन्यवाद आपका.

    1. बहुत बहुत आभार और धन्यवाद आपका.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *