नारी, तुम नारायणी…
नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।

नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।