नारी शक्ति, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती प्रेरक हिंदी कविता की यथार्थवादी छवि।

“नारी केवल देह नहीं”

नारी केवल देह नहीं” नारी के अस्तित्व, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक गौरव पर आधारित एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है। यह रचना नारी को केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि त्याग, ममता, शक्ति और संस्कृति की वाहक के रूप में देखने का संदेश देती है।

Read More
सूर्योदय के समय चट्टान पर आत्मविश्वास से खड़ी भारतीय महिला, चेहरे पर दृढ़ता और शक्ति का भाव।

कुछ भी कहो…

“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।

Read More

रावण बहुतेरे

आज रावण के पुतले भले ही जलाए जाएँ, लेकिन वास्तविक रावण अब दस सिर वाले नहीं हैं। वे एक सिर वाले हैं और समाज में असंख्य रूपों में मौजूद हैं। जहाँ बाहर श्याम वस्त्रों में रावण का प्रतीक जलता है, वहीं श्वेत वस्त्रों में छुपे अनेक रावण रोज़ हमारे बीच घूमते हैं। यह रावण अब केवल सीता-हरण तक सीमित नहीं रहे, बल्कि हर दिन न जाने कितनी सीताओं का अपहरण और चीर-हरण होता है। मासूमियत की नीलामी होती है और हवस की भट्टी में उसका भस्म किया जाता है। असली चुनौती इन सफेदपोश रावणों का दहन करने की है। सच्चा विजयदशमी तभी होगी जब इनका सर्वनाश किया जाए।

Read More