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भारतीय नारी के विभिन्न रूपों—बेटी, पत्नी और माँ—को दर्शाता एक प्रेरणादायक चित्र, जो स्त्री शक्ति, मातृत्व और गरिमा का प्रतीक है।

नारी, तुम नारायणी…

नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।

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नारी शक्ति, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती प्रेरक हिंदी कविता की यथार्थवादी छवि।

“नारी केवल देह नहीं”

नारी केवल देह नहीं” नारी के अस्तित्व, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक गौरव पर आधारित एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है। यह रचना नारी को केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि त्याग, ममता, शक्ति और संस्कृति की वाहक के रूप में देखने का संदेश देती है।

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सूर्योदय के समय चट्टान पर आत्मविश्वास से खड़ी भारतीय महिला, चेहरे पर दृढ़ता और शक्ति का भाव।

कुछ भी कहो…

“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।

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रावण बहुतेरे

आज रावण के पुतले भले ही जलाए जाएँ, लेकिन वास्तविक रावण अब दस सिर वाले नहीं हैं। वे एक सिर वाले हैं और समाज में असंख्य रूपों में मौजूद हैं। जहाँ बाहर श्याम वस्त्रों में रावण का प्रतीक जलता है, वहीं श्वेत वस्त्रों में छुपे अनेक रावण रोज़ हमारे बीच घूमते हैं। यह रावण अब केवल सीता-हरण तक सीमित नहीं रहे, बल्कि हर दिन न जाने कितनी सीताओं का अपहरण और चीर-हरण होता है। मासूमियत की नीलामी होती है और हवस की भट्टी में उसका भस्म किया जाता है। असली चुनौती इन सफेदपोश रावणों का दहन करने की है। सच्चा विजयदशमी तभी होगी जब इनका सर्वनाश किया जाए।

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