विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ खड़े, मानवता और एकता का प्रतीक दृश्य

धर्म क्या है

“धर्म क्या है” एक ऐसी प्रेरणादायक हिंदी कविता है, जो धर्म की वास्तविक परिभाषा को सरल और गहन शब्दों में प्रस्तुत करती है। आज के समय में जब धर्म को अक्सर केवल पूजा-पाठ, रीति-रिवाज और बाहरी आडंबरों तक सीमित कर दिया जाता है, यह कविता हमें उसके मूल स्वरूप की ओर लौटने का संदेश देती है।

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रसोई में काम करती एक भारतीय माँ, चेहरे पर थकान के बावजूद संतोष और ममता की मुस्कान, परिवार के प्रति समर्पण और त्याग को दर्शाता भावनात्मक दृश्य।

माँ होना ही कठिन लगा

माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।

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खिड़की के पास बैठा व्यक्ति, मन की थकान और अकेलेपन को दर्शाता दृश्य

“मन थके तो कौन?”

मन की थकान वह पीड़ा है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। “मन थके तो कौन?” कविता इसी अदृश्य दर्द को उजागर करती है, जहाँ तन की बीमारी का इलाज तो मिल जाता है, लेकिन मन के घाव केवल एक सच्चे अपने की उपस्थिति से ही भरते हैं। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी सबसे बड़ा सहारा सिर्फ सुनने वाला एक दिल होता है।

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सराफा चौपाटी के खिलाफ व्यापारी एकजुट

एक सितंबर से एक भी दुकान नहीं लगने देंगे, अन्यत्र शिफ्ट करें दस दिन बाद बड़ा-छोटा सराफा में चौपाटी लग पाएगी या नहीं इसे लेकर रस्साकशी की स्थिति बनना तय है। भाजपा को भी राजनीति करना है, पेंच यह भी फंस रहा है कि सराफा क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार का हिस्सा है और भाजपा…

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एक सफ़र ऐसा भी….

ट्रेन में मिली उस नीली आँखों वाली उदास महिला ने जाते-जाते एक सवाल छोड़ दिया “क्या ब्याहतों के पर काट दिए जाते हैं?” उसकी मुस्कान कुछ पल की थी, बस उतनी देर जितनी देर कोई सावन अपनी बरसात रोक कर खिड़की से झाँकता है। वह स्टेशन पर उतर गई, और मैं सोचता रह गया . कितनी स्त्रियाँ अपनी आँखों में बरसात को कैद करके जी रही हैं, जैसे उन्हें कभी बरसना ही न हो।

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Young adult at a crossroads between family values and worldly diplomacy, symbolizing the moral dilemma between ethics and ambition.

संस्कार या सत्ता

यह कहानी बताती है कि कैसे युवा अपने संस्कारों और जीवन मूल्यों के बीच फंस जाते हैं और Diplomacy की दुनिया में कदम रखते ही उन्हें अप्रत्याशित परिणामों का सामना करना पड़ता है

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एक जोड़ा चुपचाप शाम के समय एक शांत कमरे में बैठा है, पुरुष अपनी प्रेमिका के पास हाथ रखकर, दोनों के चेहरे पर कोमल भाव, हृदय की धड़कन और नज़दीकी की अनुभूति साफ़ झलक रही है।

चुपचाप, बस तुम्हारे पास

उनके साथ बिताया हर पल कुछ अलग ही होता था। न वो कुछ कहते, न ही जताते, फिर भी उनकी उपस्थिति में सब कुछ पूरा लगता। इंतजार भी मीठा लगता और दिल की धड़कन की रफ़्तार को संभालते हुए, हम बस उनके पहलू में बैठते रहते। शामें इतनी खामोशी से गुजरतीं कि शब्द भी कम पड़ जाते, और हर लम्हा अपने आप में रूह तक पहुँचने वाला एहसास बन जाता। यही वह समय था, जब मौन ही सबसे गहरी बातें कह जाता।

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छत पर खड़ी आत्मविश्वासी भारतीय महिला”

ख्वाहिशें

“ख्वाहिशें” एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है, जो महिलाओं को अपने सपनों को जीने और खुद के लिए खड़े होने का साहस देती है। यह कविता समाज की उन बंदिशों को चुनौती देती है, जो अक्सर महिलाओं की इच्छाओं और स्वतंत्रता को सीमित कर देती हैं।

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सावन, राखी और एक खाली दहलीज़

हर बेटी के लिए मायका सिर्फ़ घर नहीं, सांसों की मिट्टी होता है।पर कुछ बेटियों के हिस्से वो आँगन नहीं आता, जहां राखी, सावन और तीज मुस्कुराते थे। उनके त्योहार भी सादे, आंखें भीगी, और दिल भीतर से थोड़ा रिक्त रहता है…

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सागर और मन

सागर और मन का रिश्ता गहरा है। जब चाँद की छाँव में ऊँची तरंगें उठती हैं, तो उनका झिलमिलाना किसी स्वप्न जैसा प्रतीत होता है। लहरें आकाश को छूने की चाह में उमड़ती हैं, लेकिन अंततः अपने ठिकाने पर लौटकर शांत हो जाती हैं।

सागर ने समय के प्रवाह से यही सीखा है—हर क्षण, हर रंग बदलता रहता है। कभी वह मचलता है, तो कभी थमकर भीतर के बुझते-सुलगते अलाव को सँजोए रहता है। चाँदनी की चादर में ढकी लहरें रात की खामोशी में खो जाती हैं। वे कभी सौम्य स्वर बनती हैं, तो कभी प्रबल गूँज की तरह उभरती हैं।

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