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धर्म क्या है

विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ खड़े, मानवता और एकता का प्रतीक दृश्य सच्चा धर्म मंदिर या मस्जिद में नहीं, इंसानियत में बसता है।"

नमिता सिन्हा, प्रसिद्ध लेखिका, बंगलुरू

धर्म क्या है, ये प्रश्न पुराना,
पर उत्तर अब भी है अनजाना।

धर्म न केवल पूजा करना,
न ही केवल माला जपना।
प्रेम, अहिंसा, दया की आशा
यही धर्म की सच्ची परिभाषा।

धर्म वही, जो हर जीव में
देखे ईश्वर का रूप।
दया, करुणा का भाव जिसमें,
धर्म है वहीं ज्ञान-स्वरूप।

माता-पिता की सेवा करना,
इससे बड़ा न सत्कर्म कोई।
मानवता, इंसानियत की पूजा
इससे बड़ा न धर्म कोई।

मानवता ही धर्म का गहना,
सत्य मार्ग पर अडिग रहना।
बिना भेदभाव के व्यवहार
यही है सच्चा धर्म-संस्कार।

न हो लोभ, न हो अभिमान,
धर्म है नारी का सम्मान।
न केवल माला, न साधु वेश
धर्म है देना अहिंसा का संदेश।

मज़हब से जो ऊपर उठ जाए,
वही इंसानियत की राह दिखाए।
सत्य जहाँ अडिग रहता है,
धर्म का दीप वहीं जलता है।

न मंदिर, न मस्जिद की बात,
धर्म है इंसानियत की सौगात।
जहाँ सभी का हो सम्मान,
वहीं है सच्चा धर्म-स्थान।

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