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बीएमडब्ल्यू मोटरराड इंडिया ने डीलर नेटवर्क का किया विस्तार

बीएमडब्ल्यू मोटरराड ने भारत में अपने डीलर नेटवर्क को और मजबूत करते हुए जेएसपी मोटरराड के दूसरे डीलरशिप की बेंगलुरु, कर्नाटक में शुरुआत की है। यह डीलरशिप एच. नं. 115/3, प्रॉपर्टी नं. 93/2सी, 7वीं मेन रोड, बी नारायणपुरा, महादेवपुरा पोस्ट, बेंगलुरु अर्बन, कर्नाटक – 560048 पर स्थित है।जेपीएस मोटरराड हैदराबाद, विजयवाड़ा और बेंगलुरु में बीएमडब्ल्यू मोटरराड का प्रतिनिधित्व करता है और इसके डीलर प्रिंसिपल श्री सुधर्शन पोनराज हैं।

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सावन में हरियाली तीज मनाती सुहागिन महिला, हाथों में मेहंदी और हरी चूड़ियां

हरियाली तीज

हरियाली तीज सावन, प्रेम, सुहाग और विश्वास का पर्व है। प्रस्तुत कविता में मेहंदी, झूले, हरी चूड़ियों और शिव-पार्वती के माध्यम से प्रेम और समर्पण की सुंदर अभिव्यक्ति की गई है।

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 एनबीसीसी बनाएगा भविष्य का नवीन नागपुर

अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं वित्त केंद्र (आईबीएफसी) का होगा विकास पुणे/नागपुर,– नागपुर के शहरी परिदृश्य को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एन.एम.आर.डी.ए.) के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के अंतर्गत नवीन नागपुर को एक योजनाबद्ध…

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…अगर ज़िंदगी फिर से मुड़ जाए

इस कविता में एक स्त्री अपने जीवन के उस मोड़ पर खड़ी होकर गुज़रे समय को फिर से जीने की ख्वाहिश करती है — वो अधूरे सपने, वो रिश्ते, वो बचपन की अलमारी, और माँ की बातें… सब कुछ एक बार फिर सहेजने की उम्मीद लिए। यह एक आत्ममंथन है, एक नई शुरुआत की ओर बढ़ने का भावुक आह्वान।”

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यदि प्रेम में होते बुद्ध…

अगर बुद्ध प्रेम में होते, तो शायद वे किसी वृक्ष की छाया के बजाय किसी प्रिय की मुस्कान को ध्यानस्थ होने का स्थान चुनते। उनके उत्तर तब भी मौन होते, लेकिन उस मौन में प्रेम की एक गहरी समझ समाई होती। वे प्रेमिका की आँखों में जीवन का अर्थ खोजते, जैसे निर्वाण की झलक किसी मानस में देख रहे हों। वे प्रेम को उसी तरह थामते जैसे उन्होंने उस कटोरे को थामा था जिसमें संसार का सारा दुःख समाया था—बिना अपेक्षा, बिना आहट। उनका प्रेम निःस्वार्थ और निर्लिप्त होता, जैसे संन्यास लिया हो—पूरी तरह समर्पित, फिर भी पूर्ण स्वतंत्र। न उसमें मोह होता, न विरक्ति—सिर्फ सहज स्वीकृति। प्रेम, उनके लिए, कोई उन्माद नहीं बल्कि एक शांत, स्थिर जलधारा होता, जो “मैं” और “तू” के पार ले जाती। तब शायद हम भी समझ पाते कि प्रेम भी एक मार्ग है—मोक्ष की ओर, जहाँ खोना ही पाना है, और समर्पण ही सबसे बड़ा बोध।

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दोस्ती कैसे करें

दोस्ती का साइंस: नए दोस्त बनाने के 5 आसान तरीके

मनोविज्ञान के अनुसार दोस्ती बनाना कोई कठिन कला नहीं, बल्कि एक समझी जा सकने वाली प्रक्रिया है. बार-बार मिलना, खुलकर बातचीत करना, पहल करना और रिश्तों को समय देना ये छोटे लेकिन असरदार कदम किसी भी व्यक्ति को मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली दोस्ती बनाने में मदद कर सकते हैं.

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मैंने समंदर देखा

गोधूलि बेला में सुनहरी रश्मियों से जगमगाता समंदर, हवा और लहरों के खेल के बीच दो प्रेमियों की पहली निकटता की कहानी। लेखक ने समंदर, लहरों और हवा की प्राकृतिक सुंदरता के साथ पात्रों की नज़रों, झुमके और बेली के गजरे के माध्यम से रोमांच और रोमांस को जीवंत किया है। हर विवरण में वातावरण और संवेदनाएँ इतनी वास्तविक लगती हैं कि पाठक खुद उस समंदर किनारे मौजूद होने का अनुभव करता है। यह कहानी प्रकृति और प्रेम के बीच की नाजुक संतुलन और पहले स्पर्श की ऊष्मा को उजागर करती है।

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चाइनीज मांझे से मौत अब हत्या, लखनऊ केस से भड़के सीएम योगी,

चाइनीज़ मांझा बना कातिल

उत्तर प्रदेश में अब चाइनीज़ मांझे से होने वाली मौत को सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि हत्या माना जाएगा| मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जानलेवा मांझे को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में मर्डर का केस दर्ज किया जा सकता है|

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दयानंद महाविद्यालय में हिंदी उत्सव

19 सितंबर 2025 को दयानंद कला महाविद्यालय, लातूर में हिंदी दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हिंदी विभाग ने “नवचेतना” हिंदी साहित्य मंडल की स्थापना की, जो विद्यार्थियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देगा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रतिमा वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि श्री बजरंग पारिख ने हिंदी भाषा की महत्ता और वर्तमान समाज में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानाचार्य डॉ. शिवाजी गायकवाड़ ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आत्मा की अभिव्यक्ति है। छात्रों ने भावनात्मक और प्रेरणात्मक कविताएँ प्रस्तुत कीं और हिंदी के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लिया।

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बर्फ में दबी आग हिंदी कहानी की कृति बारिश की बूंद को निहारते हुए

बर्फ में दबी आग

कृति ने परिवार के लिए अपने सपनों और इच्छाओं को बार-बार पीछे रखा, लेकिन मन के भीतर सुलगती आग कभी बुझी नहीं. वर्षों बाद उसे अपने त्याग का प्रतिफल एक अप्रत्याशित स्नेह में मिलता है.

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