
डॉ. संजुला सिंह “संजू” जमशेदपुर
हरियाली तीज है सावन की,
प्रेम-स्नेह का मधुर त्योहार है,
धरती के आंगन में मानो
उतरा हरित श्रृंगार है।
सावन की रिमझिम बूंदों में
हरियाली का श्रृंगार है,
तीज सुहागिन के सपनों का
प्रेम भरा त्योहार है।
मेहंदी रची दोनों हाथों में
सिमटा प्रियतम का अरमान है,
आज सुहागिनें खूब सजी हैं,
लगे नभ में तारों की कतार है।
झूले की हर एक पींग में
प्रियतम का अनुराग है,
मेहंदी की हर एक रेखा में
जीवन भर का सुहाग है।
माथे की बिंदिया है कहती,
मन में प्रेम अपार है,
हरी चूड़ियों की खनक से लागे,
रिश्तों में मधुर झंकार है।
हृदय में शिव-पार्वती बसाकर
हर्षित हो रहे सभी हैं आज,
अपने पिया की उम्र की खातिर
पूजे शिव-गौरी को आज।
जहां समर्पण सच्चा होता,
वहां प्रेम अमर हो जाता है,
जिस घर में विश्वास महकता,
वह घर मंदिर बन जाता है।
मां पार्वती की तप-शक्ति से
ये नारी को सम्मान मिला,
शिव के पावन श्रीचरणों में
अटूट प्रेम का दान मिला।
हर घर में आज दीप जले
और उर में ये विश्वास हो,
सूखे रिश्तों की डाली पर
प्रेम की फिर से आस हो।
हर सावन ये खुशियां बरसे,
हर घर मंगल गान हो,
हर नारी के माथे का
सिंदूर सदा पहचान हो।
हरियाली तीज का पर्व
हमको संदेश सुनाता है,
जहां विश्वास और प्रेम रहे,
बस! वहीं जीवन हरियाता है।
तीज केवल एक श्रृंगार नहीं,
ये प्रेम का संस्कार है,
हो जहां हृदय से खूब समर्पण,
वहीं जीवन साकार है।
