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स्त्री

प्रेम में डूबी स्त्री कभी नादान-सी लगती है, कभी इतनी कोमल कि जैसे स्पर्श से बिखर जाए। उसके भीतर सपनों की हलचल है. उमड़ती-घुमड़ती, तितर-बितर होती तमन्नाएँ। वह तितली-सी है, जिसे उड़ना तो है, आसमान को छूना भी है, पर उसके चारों ओर फैली दुनिया उसे फूलों के दायरे से बाहर जाने ही नहीं देती। आसमान ऊँचा है, अपने ही गर्व में अडिग; और ज़मीन पर खड़ी वह स्त्री अपने पंख फैलाने को तैयार होते हुए भी उड़ नहीं पाती।

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उम्मीदों की खिड़की से

ज़िंदगी में कितनी ही मुश्किलें क्यों न आएँ, उम्मीदों की खिड़की हमेशा खुली रहनी चाहिए। दुनिया कुछ भी कहे, लेकिन अपने हौसले को मज़बूत बनाए रखना ज़रूरी है। आंधियाँ आएँ तो भी दिल का दिया जलता रहना चाहिए। इंसान को पत्थर नहीं बनना है, बल्कि टूटकर और तराशकर अपने आप को बेहतर बनाना है। इम्तिहान तो जीवन में बार-बार आएँगे, लेकिन हर बार हमें अपने लक्ष्य पर टिके रहना है। यही उम्मीद और यही हौसला हमें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं।

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खाने की पसंद-नापसंद: स्वाद से ज़्यादा मन का खेल

“मशरूम का स्वाद हो या मटन-फिश का, कई बार भोजन के प्रति हमारी पसंद-नापसंद सिर्फ स्वाद की बात नहीं होती। यह हमारी परवरिश, संस्कृति और बचपन की थाली का असर होता है। जब कभी आपसे कोई आग्रह करे कि ‘बस एक बार टेस्ट कर लो’, तो याद रखिए—हर स्वाद के पीछे एक स्मृति होती है। मशरूम को लेकर मन की दूरी, स्वाद कलिकाओं की नहीं, बल्कि गहरे संस्कारों और भावनाओं की कहानी है। खाने का चुनाव शरीर और आत्मा दोनों की सहमति से होता है।”

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बारिश की बूंदें: धरती और आकाश के प्रेम का अद्भुत काव्य

बारिश की बूंदें

बारिश की पहली बूंद जब सूखी धरती को छूती है, तो वह केवल मिट्टी को नहीं, बल्कि भावनाओं को भी जीवन देती है। यह कविता धरती और आकाश के उस अनंत प्रेम की कहानी है, जहाँ हर बूंद एक प्रेम-पत्र बनकर उतरती है और हर स्पर्श विरह को मिलन में बदल देता है। प्रकृति के मनोहारी रूपकों के माध्यम से प्रेम, वात्सल्य, प्रतीक्षा और आत्मिक एकाकार होने की अनुभूति को बेहद भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है।

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गाँव की पगडंडी पर स्कूल बैग लेकर मुस्कुराती हुई एक मासूम बालिका, संतोष और सादगी का प्रतीक।

संतुष्ट मुस्कान

अधूरी इच्छाओं और भागती जिंदगी के बीच सच्ची संतुष्टि कहाँ मिलती है? “संतुष्ट मुस्कान” कविता एक मासूम बालिका की मुस्कान में जीवन का गहरा दर्शन खोजती है।

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पुणे में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का शिकार बने वरिष्ठ नागरिक का प्रतीकात्मक दृश्य

पुणे में ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी: 82 वर्षीय बुजुर्ग से 2.74 करोड़ रुपये ठगे

पुणे के कोथरुड में एक 82 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति को साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर दो महीने में 2.74 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए। आरोपी खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लगातार दबाव बनाते रहे।

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बेंगलुरु स्टूडियो परिसर में तालाब के पास खड़ा बच्चा, मैटरनिटी फोटोशूट हादसे की प्रतीकात्मक तस्वीर

कैमरा चलता रहा, जिंदगी थम गई

बेंगलुरु के एक निजी स्टूडियो में मैटरनिटी फोटोशूट के दौरान तीन साल के मासूम की तालाब में डूबने से मौत हो गई. सात माह की गर्भवती मां शूट में व्यस्त थी, तभी खेलते-खेलते बच्चा परिसर के तालाब में गिर गया. यह दर्दनाक हादसा सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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दुविधा का रंग

यह जीवन की वह अवस्था है जहाँ न बचपन की मासूमता पूरी तरह बची है, न बुढ़ापे का सुकून मिला है। जिम्मेदारियों के बीच खड़ा इंसान कभी समाज की अपेक्षाओं को सुनता है, तो कभी अपने दिल की धीमी पुकार को। इसी द्वंद्व में वह खुद को पहचानता है और समझता है कि यही सफ़र जीवन का असली रंग है।

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नींद और शांति का राज: लैवेंडर की खुशबू

“सोने से पहले तकिए पर 2–3 बूँदें लैवेंडर तेल डालें। इसकी खुशबू तनाव कम करती है, शरीर को शांत करती है और नींद को गहरा बनाती है। भले ही असर कुछ हद तक विश्वास (प्लेसबो) से हो, फिर भी सोने का माहौल सुखद और आरामदायक बनता है।”

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड़ लगाते लोग, हरित प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति बदला नहीं लेती, केवल हिसाब बराबर करती है

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।

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