बसंत के रंग
बसंत ऋतु बाह्य सौंदर्य से आगे बढ़कर आत्मा के जागरण का संदेश देती है। यह लेख ईश्वर-स्मरण, विरह-साधना और आत्मिक प्रकाश के माध्यम से आंतरिक बसंत की अनुभूति कराता है।

बसंत ऋतु बाह्य सौंदर्य से आगे बढ़कर आत्मा के जागरण का संदेश देती है। यह लेख ईश्वर-स्मरण, विरह-साधना और आत्मिक प्रकाश के माध्यम से आंतरिक बसंत की अनुभूति कराता है।
यह कविता सत्य, ईमान, सादगी और विश्वास पर आधारित जीवन-दृष्टि को उजागर करती है, जहाँ पवित्र प्रेम और आत्मसम्मान सर्वोपरि हैं।
कायरता को त्याग कर निर्भय संघर्ष का आह्वान करती यह कविता मनुष्य को लक्ष्य, धैर्य और कर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। वीर-रस का प्रभावशाली घोष।
बारह साल की शादी के बाद भी घर में बच्चे की किलकारी नहीं गूँजी थी. हरमन और परमिंदर के बीच रिश्ते की खामोशी धीरे-धीरे आदत बन चुकी थी. बेरोज़गारी, बेबसी और अधूरेपन के बीच हरमन की माँ अपनी सुई से रजाइयाँ सीती रही—हर टाँके में एक टूटी हुई उम्मीद पिरोती हुई.
परमिंदर ने हालात से लड़ने की कोशिश की, मगर समाज की नजरें और रिश्तों की उलझनें उसे उस मोड़ पर ले आईं, जहाँ सही और गलत के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है. जब एक बच्ची जन्मी, तो सच सब जानते थे, पर खामोशी ने ही इज़्ज़त का कंबल ओढ़ लिया.
पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के दीक्षा दिवस पर ज्ञान मंदिर में दिनभर गुरु भक्ति, प्रवचन, तप, जाप और महाआरती के आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए.
सिंहगढ़ रोड की चढ़ाइयों ने Pune Grand Tour 2026 के स्टेज-2 को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। 105.3 किमी की रेस में ल्यूक मुडग्वे ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की।
महिदपुर रोड में साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश। गुरुदेव जयघोष, धर्मसभा और रतलाम चातुर्मास निमंत्रण।
सबसे खूबसूरत स्त्री” एक सशक्त कविता है जो स्त्री के सौंदर्य को संघर्ष, दृढ़ संकल्प और अदम्य जिजीविषा के रूप में परिभाषित करती है। यह कविता स्त्री की मौन शक्ति और आत्मबल को स्वर देती है।
सौ सुनार की, एक लोहार की!” एक प्रेरणादायक लघुकथा है, जिसमें एक माँ अपनी बेटी के सपनों के साथ खड़ी होती है और बेटी अपनी मेहनत से समाज की सोच को करारा जवाब देती है।
बांग्ला लेखिका आशापूर्णा देवी का कथा संसार भारतीय साहित्य की अनुपम उपलब्धि है। हिंदी परिवार द्वारा आयोजित समारोह में डॉ. बूला कार की आलोचना कृति आशापूर्णा तुमि सम्पूर्णा के सात खंडों का लोकार्पण किया गया।