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सत्य का अनुसरण

सत्य और ईमानदारी पर आधारित हिंदी कविता

डॉ. संजुला सिंह “संजू” वरिष्ठ पत्रकार, कवयित्री, जमशेदपुर (झारखंड )

सत्य का अनुसरण
  ही मैं चाहती,
झूठ का आवरण
  मैं नहीं चाहती।

लिप्त पापों की दौलत
  की चाह नहीं,
शुद्धता से कमाई
  ही धन चाहती।

लोभ का आचरण
  मैं नहीं चाहती,
क्षोभ का आवरण
  मैं नहीं ओढ़ती।

वैदेही ने सहा था
  राम से विरह,
स्वर्ण का वह हिरण
  मैं नहीं चाहती।

नाम, ख्याति, प्रसिद्धि हो
  तो स्वयं की हो,
दूसरों का सहारा
  मैं नहीं चाहती।

रोटी सूखी मिले
  तो भी ग़म नहीं,
मेवा चोरी का
  बिल्कुल नहीं चाहती।

कपड़े दो जोड़ी हों
  तो भी ग़म न कोई,
कपड़े ईमान के हों
  यही चाहती।

छल-कपट की बनारसी
  न भाती हमें,
सूती साड़ी ही
  ख़ुद्दारी की चाहती।

प्रेम में हीरे-मोती
  नहीं चाहती,
चाहती बस यक़ीं
  और कुछ नहीं चाहती।

प्रेम राधा-कृष्ण सा
  हो पावन सदा,
प्रेम में कोई लोचा
  नहीं चाहती॥

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