संत पंचमी और सरस्वती पूजा के अवसर पर वसंत के रंगों और प्रकृति की सुंदरता को दर्शाती हिंदी कविता का प्रतीकात्मक दृश्य

वसंत का संगीत

यह कविता बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सरस्वती माता के आशीर्वाद, प्रकृति के बदलते रंग और ऋतुओं के मिलन को उजागर करती है। वसंत के आगमन से जीवन में उमंग और विद्या की महत्ता का सुंदर चित्रण।

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ग्रामीण स्त्री, श्रम और विस्थापन के प्रतीकों के साथ सामाजिक यथार्थ दर्शाती हिंदी कविता का दृश्य

वसंत नहीं लौटता

यह कविता बसंता और वसंत के प्रतीक के माध्यम से श्रम, विस्थापन और जीवन के असंतुलन को दर्शाती है। सौंदर्य, पर्यटन और संघर्ष के बीच का कटु यथार्थ इसमें मुखर है।

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मानस का परिमल

यह कविता विकसित मानस, सद्भाव, मानवता और वैचारिक चेतना की सुगंध को रेखांकित करती है। संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर सत्य और परहित के मार्ग पर चलने का संदेश देती सशक्त रचना।

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कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

काली राख की बस्ती

कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

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किसको ढोओगे

यह कविता सत्ता के अहंकार, चुनावी राजनीति और सामाजिक विभाजन पर तीखे सवाल खड़े करती है। “किसको ढोओगे” आम जनता की आवाज़ बनकर लोकतंत्र के मूल्यों की याद दिलाती है।

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साध्वी शाश्वत प्रिया श्री जी महाराज साहब धर्म सभा को संबोधित करते हुए

खाली हाथ नहीं, श्रद्धा के साथ हों परमात्मा के दर्शन

पुण्योदय के योग से हमें परमात्मा का जिन शासन और जैन कुल प्राप्त हुआ है. मनुष्य भव को सफल बनाने के लिए केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और विधिपूर्वक अष्टप्रकारी पूजा के साथ धर्म आराधना आवश्यक है. देव, गुरु और धर्म के प्रति जागृत भाव ही जीवन को सही दिशा देते हैं.

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सासवड़ से बारामती तक रोमांच की रफ्तार

सासवड़ से शुरू हुए बजाज पुणे ग्रैंड टूर 2026 के तीसरे चरण ने पूरे क्षेत्र को रोमांच और जनउत्साह से भर दिया. उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई इस अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग रेस में गांव-गांव नागरिकों की भारी भागीदारी देखने को मिली. 137.7 किलोमीटर लंबे इस चुनौतीपूर्ण सफर में खेल भावना, साहस और जनसहयोग का अनूठा संगम नजर आया.

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विश्व पुस्तक मेले में उज्जैन की गूंज: ‘व्यंग्य के रंग’ में शामिल डॉ. हरीशकुमार सिंह

राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित व्यंग्य संकलन ‘व्यंग्य के रंग’ में उज्जैन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह की रचना का चयन शहर के लिए गौरव का विषय बना।

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पहली यादों और भावनाओं को दर्शाता भावुक दृश्य

पहली बात… जो हर पल आती है याद…

जीवन के हर पहले अनुभव ख़ुशी हो या पीड़ा हमारी स्मृतियों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। यह लेख उन्हीं अमिट यादों की भावनात्मक यात्रा है।

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