अधूरी बारिश की दास्तान
गाँव का पता ही भूल गया हो। बादल चिट्ठियों की तरह आते हैं, लेकिन बिना संदेश दिए लौट जाते हैं। जिन पर “देवभूमि” लिखा होता है, वहाँ तो मेघदूत की तरह वे आँसू और वज्र के साथ बरसते हैं, पर यहाँ आँगन उमस और प्रतीक्षा में सूखा पड़ा है। खपरैल की छतें अब भी बारिश का पानी सोखने को तैयार बैठी हैं, और पेड़ों से पत्ते पीले होकर झरते जा रहे हैं। इस चित्रण में वर्षा की अनुपस्थिति केवल मौसम का अभाव नहीं है, बल्कि एक गहरी भावनात्मक कमी और विरह का प्रतीक बन जाती है।
मैं मरूंगी केवल…
यह कविता एक स्त्री के भीतर के साहस को दर्शाती है, जो हर डर और दर्द से ऊपर उठकर केवल सच्चे प्रेम में समर्पित होना जानती है।
बापू तेरे देश में…
‘बापू तेरे देश में’ कविता बदलते सामाजिक परिवेश की तस्वीर सामने रखते हुए सत्य, मानवीयता, पर्यावरण और सामाजिक व्यवहार जैसे विषयों पर गंभीर सवाल उठाती है।
माफ़ कर दे मुझे…
यह ग़ज़ल एक टूटे हुए दिल की सच्ची पुकार है, जहाँ प्रेम अब भी जीवित है, लेकिन रिश्ते की दूरी उसे लगातार घायल करती रहती है। शायर ने बड़ी सादगी और गहराई से उस भावना को व्यक्त किया है, जब इंसान अपने ही प्रेम में खुद को खो देता है।
जन्मदिन की सौगात
यह बाल कविता जन्मदिन के उत्सव को केवल केक और उपहारों तक सीमित न रखकर, उसे संस्कार, सेवा और करुणा से जोड़ती है। पेड़ लगाना, पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, बड़ों का सम्मान और सादगीपूर्ण जीवन जैसे मूल्य इस रचना को बच्चों के लिए शिक्षाप्रद और प्रेरक बनाते हैं।
क्रान्ति
ह कविता तात्कालिक सुख और अधैर्य से भरी दुनिया के बीच धैर्य, साधना और विचार की क्रान्ति का घोष है। रिश्तों को मौसमी फल-फूल नहीं, बल्कि चिनार और आम जैसे दीर्घजीवी वृक्ष मानते हुए यह रचना बताती है कि सच्चा परिवर्तन समय, सतत प्रयास और विश्वास से जन्म लेता है और वही विचारों की वास्तविक क्रान्ति है।
एडोर डायबिटीज रिवर्सल सेंटर का नया स्थान
पुणे स्थित अडोर डायबिटीज रिवर्सल काउंसलिंग सेंटर ने दीक्षित जीवनशैली के माध्यम से हजारों मरीजों को दवा के बिना मधुमेह नियंत्रित करने में मदद की है। अब तक 3500 से अधिक रोगियों ने पंजीकरण कराया है और सैकड़ों ने बिना दवा के HbA1c स्तर को 6.5 से नीचे बनाए रखा है। वरिष्ठ मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. जगन्नाथ दीक्षित के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र अब नल स्टॉप के पास नए स्थान पर स्थानांतरित हुआ है, जहां सभी सेवाएं पूर्णतः नि:शुल्क उपलब्ध होंगी।
पिंक फ्रॉक
पिंकी की ज़िद नई पिंक फ्रॉक की थी, लेकिन जब उसने अपनी सहेली मुन्नी को फटे-पुराने कपड़ों में देखा तो उसका मन बदल गया। उसने अपनी सुंदर फ्रॉक मुन्नी को दे दी। उस पल उसे समझ आया कि असली खुशी पाने में नहीं, बाँटने में है।
