शब्दों से सुकून
लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा का संवाद है। लिखिए क्योंकि शब्द सुकून देते हैं, सपनों को पहचान देते हैं और आपको आपकी कहानी का रचनाकार बनाते हैं।
अगर ईश्वर एक है तो हम क्यों बंटे हैं?”
हे प्रभु , हे मेरे रचयिता आपने हम मानुस जात की खोपड़ी के अंदर जो दिमाग नाम की लुगदी भरी है न ? वही लुगदी हलचल करती रहती है, प्रश्न करती है, उत्तर मांगती है , खुश होती है , नाराज़ होती है … तो आज मैं नाराज़ हूँ … मेरी नाराज़गी आप से ही…
पहचान लिखो…
एक उम्र-दराज़ औरत अपने वजूद की दास्तान खुद नहीं. उस नज़र से लिखवाना चाहती है जो उसे सच में समझती है। दुनिया ने उसे अपने पैमानों से तौला, पर वह बस इतना चाहती है कि कोई उसे “इंसान” की तरह लिखे।
हो जाओगे लापता
यह कविता प्रेम की पवित्रता, आत्मिक जुड़ाव और भावनाओं की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त करती है। इसमें मुहब्बत को वासना से अलग एक रूहानी एहसास के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
बेंगलुरु में सावन मिलन महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न
सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद, आरटी नगर, बेंगलुरु की महिला शाखा द्वारा सावन मिलन महोत्सव अत्यंत धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम बिहार भवन, बेंगलुरु में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अमिता झा जी ने अत्यंत सौंदर्यपूर्ण ढंग से की। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष ऊषा झा और डॉ. अर्चना झा एवं बिंदु सिंह जी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सचिव डेज़ी शर्मा और अपर्णा शर्मा की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। समिति की कोषाध्यक्ष निधि शर्मा तथा सदस्य हीरा झा और शीला सिंह ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चिंता और चिता: एक जीवन-दर्शन
चिंता मनुष्य को भीतर से जलाती है, जबकि चिंतन उसे जीवन का सही मार्ग दिखाता है। यह लेख मानसिक शांति, ईश्वर स्मरण और सकारात्मक जीवन दृष्टि का संदेश देता है।
आज लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण
भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर आज साल का अंतिम खग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारत समेत विश्व के कई हिस्सों में दिखाई देगी। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट 2 सेकंड होगी।
ज़ीरो नाइट
हर साल शहरों के होटलों में ज़ीरो नाइट भव्यता से मनाई जाती है, लेकिन इस बार युवा लड़कियों ने नशे में अपनी मर्यादा खो दी। नशे और तेज़ गाड़ी के कारण कई दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें परिवारों की खुशियाँ भी मिट गईं। यह घटनाएँ समाज और संस्कृति पर प्रश्न खड़े करती हैं।
