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जब दिल बोले…यहीं ठीक हूँ

पर्स में रखा दिल रोमांटिक हिंदी गद्य अहसास पर्स में रखा दिल

मीनाक्षी वर्मा, लेखिका,

जी, आपके पर्स के किसी कोने में मेरा दिल 💝 रखा है,
और वह मुझसे शिकायत कर रहा है कि आपके मेकअप की चीज़ें उसे चुभ रही हैं।

तो मैंने कहा—
“अच्छा! ऐसी बात है? ठीक है, मैं तुझे उनसे कहकर कहीं और रखवा देता हूँ।”

इतना सुनते ही दिल तपाक से बोला-
“न… न… न… ऐसा हरगिज़ मत करना!
मैं यहाँ बिल्कुल ठीक हूँ, मज़े में हूँ।”

मैंने कहा—
“अरे वाह! अभी तो तू बोल रहा था कि मेकअप की चीज़ें तुझे चुभ रही हैं।
ज़रा मुझे भी तो बता, ऐसी क्या बात है कि उनके पर्स में ही पड़ा रहना चाहता है?”

दिल बड़ी मासूमियत से बोला-
“तुम नहीं समझोगे यार… यह अहसास की बात है।”

मैं बोला-
“अरे वाह! मेरी बिल्ली मुझसे ही म्याऊँ!
चल जल्दी से बोल, वरना तेरी शिकायत कर के तुझे किसी कबाड़े में फिंकवा दूँगा।”

तो दिल घबराकर बोला-
“नहीं यार… ऐसा मत करना।
वो बात दरअसल ये है कि जब वो कोई सामान निकालने के लिए पर्स में हाथ डालती हैं
और उनकी उँगलियाँ मुझे छू जाती हैं,
तो मैं सिहर उठता हूँ।

उनके स्पर्श मात्र से मुझे इतना सुकून मिलता है
कि उसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है।
फिर मुझे पता ही नहीं चलता
कि मैं दबा पड़ा हूँ या कौन-सी चीज़ मुझे चुभ रही है।

बस इसी मीठे अहसास के साथ
मुझे वहीं पड़ा रहने दो यार… प्लीज़।”

मैंने कहा-
“अरे वाह! तू तो बड़ा खुशनसीब है।
और जब तेरी यही मर्ज़ी है, तो ठीक है भाई 💝
अब ऐसा कर—
जब तू उनके साथ हर पल रहता ही है,
तो तू उनका हमेशा ख़याल रखना यार…”

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