पुणे, 11 जुलाई (लाइव वॉयर न्यूज नेटवर्क)
साधु वासवानी मिशन, पुणे में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व इस वर्ष भी आध्यात्मिक उल्लास और गहन श्रद्धा के साथ मनाया गया। गुरुवार को आयोजित इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु सम्मिलित हुए। यह दिन पूज्य साधु वासवानी और दादा जे.पी. वासवानी जी को समर्पित रहा, जिन्हें लाखों लोग अपने आध्यात्मिक गुरु के रूप में मानते हैं।
सुबह ६ बजे श्रद्धालुओं ने गुरुजनों की समाधियों पर जलाभिषेक व प्रतिमाओं का शुद्धिकरण कर दिन की शुरुआत की। इसके पश्चात १०८ हवनों का आयोजन किया गया, जिनमें १०८ गायत्री मंत्रों का जाप किया गया। इस दिव्य अनुष्ठान में बच्चों ने भी भाग लेकर श्रद्धा की मिसाल पेश की।

सत्संग सत्र में भजन-कीर्तन के साथ दीदी कृष्णा कुमारी का संदेश प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा, “गुरु सदा हमारे साथ होते हैं, वे हमारी आत्मा के पथदर्शक हैं। आवश्यकता है तो केवल शिष्य की आस्था, समर्पण और साधना की।”
दोपहर में सभी श्रद्धालुओं को गुरु लंगर (भोजन प्रसाद) वितरित किया गया। सायंकाल सत्संग में पूज्य गुरुजनों के प्रेरक संदेशों की रिकॉर्डिंग्स साझा की गईं।
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में मिशन द्वारा विविध सेवा कार्य भी किए गए। पुणे की चार नगरपालिका शालाओं के ८०० से अधिक विद्यार्थियों को स्टेशनरी किट, मोज़े व रूमाल वितरित किए गए। अस्पतालों में फलों का वितरण और ज़रूरतमंद परिवारों को राशन किट भी प्रदान किए गए।

भक्तों ने अपने अनुभव भी साझा किए। वरिष्ठ श्रद्धालु राजू अक्काली ने कहा, “गुरु देने वाला, क्षमा करने वाला और प्रेम करने वाला होता है – वह ईश्वर का ही रूप है।” वहीं नीलम ने कहा, “जब जीवन में व्याकुलता आती है, तो गुरु का स्मरण ही शांति देता है।” पिछले २८ वर्षों से मिशन में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत रामप्रसाद ने पूज्य दादा को “दिक्पाल” यानी रक्षक बताया।
गौरतलब है कि गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का होता है।

साधु वासवानी मिशन, दीदी कृष्णा कुमारी जी के मार्गदर्शन में प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरण, शिक्षा सहायता, आपदा राहत व पशु सेवा जैसे कार्यों में सक्रिय रूप से कार्यरत है।

सुरेश परिहार, पुणे
