हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान की भव्य पूजा और भक्तों का उत्सव

महाबली हनुमान जयंती

महाबली हनुमान के जन्म दिवस पर भक्तों में उत्साह और भक्ति की लहर है. यह कविता उनकी शक्ति, विनम्रता और श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम को समर्पित है.

Read More

मैं कब से थी नीर की बदरी

कविता में एक स्त्री अपनी जीवन-यात्रा को स्मरण करती है। वह बताती है कि बचपन में वह माता-पिता की दुलारी थी—माँ की गुड़िया और पिता की आँखों की पुतली। आँगन और गलियों में सखियों संग खेलते-खेलते उसने प्रेम और रिश्तों को सँजोया।

फिर सपनों से भरे मन के साथ विवाह के बाद विदा हुई, नए रिश्तों की डोर बाँधी। परंतु आगे चलकर उसका जीवन वैसा सुखद नहीं रहा। पवित्र दांपत्य बंधन टूट गया, कई रातें अधूरी रह गईं। उसकी आँखें बरसती रहीं, पर मन का आँगन सूखा पड़ा रहा। इस कविता में बचपन की निश्छलता, विवाह का सपना और फिर विरह तथा विफलता की वेदना—तीनों भाव गहराई से व्यक्त हुए हैं।

Read More

मन बंजारा

मन जैसे किसी अनजानी खोज में निकल पड़ा है। अब उसे ठहराव अच्छा नहीं लगता. तपती रेत भी उसे सुकून देती है. गर्म हवाओं के थपेड़े तन को झुलसा देते हैं, पर मन फिर भी मुस्कुरा उठता है। कभी कहीं से आती करुण पुकार उसे रुला देती है, तो कभी बिना कारण हँसी में डूब जाता है। माथे की बिंदिया, हाथों की चुड़ियाँ, झूलती बालियाँ .सब जैसे जीवन की थकान को सहला जाती हैं. रंग-बिरंगे घाघरों के बीच मटमैले सपने पलते हैं, और जब रात उतरती है, तो चाँदनी सबको अपनी गोद में सुला देती है.

Read More

मतवाले नयन

आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं होतीं, वे भीतर छुपे भावों की सबसे सशक्त भाषा होती हैं। जब शब्द असहाय हो जाते हैं, तब नयन ही संवाद का कार्य संभालते हैं। कभी शिकायत, कभी शरारत, कभी विद्रोह आँखों की हर गति मन के भीतर चल रहे परिवर्तन को प्रकट कर देती है। वे मनोभावों की कुशल गुप्तचर हैं, जो बिना कुछ कहे भी सब कुछ कह जाती हैं।

Read More

रोटी की दास्तान

एक पिता जिसने बच्चों के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी, वही बुढ़ापे में भावनात्मक उपेक्षा का शिकार हो जाता है। “रोटी की दास्तान” रिश्तों की सच्चाई को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

Read More
घने विशाल पेड़ की गहरी छाया में धूप के लिए संघर्ष करते छोटे पौधे, विकास और असमानता का प्रतीक दृश्य।

विशालता की छाया में दम तोड़ता विकास

यह लेख हमारे समय के उस भ्रम को उजागर करता है जिसमें “बड़े होने” को ही “बेहतर होने” का पर्याय मान लिया गया है, और बताता है कि कैसे यही सोच नई प्रतिभाओं और अवसरों को दबा देती है।

Read More

रावण दहन

यह लेख रावण दहन की पौराणिक कथा को जीवंत और संवादात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि रावण केवल एक राक्षस नहीं बल्कि विद्वान और शिवभक्त था, पर अहंकार और लालच के कारण उसका संहार निश्चित था। लंका युद्ध के समय देवी दुर्गा की पूजा और हनुमानजी की चतुरता से रावण का यज्ञ विफल हुआ और उसका संहार सुनिश्चित हुआ। इस कथा के माध्यम से विजया दशमी केवल पुतला जलाने का उत्सव नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बन जाती है।

Read More
भारत में रोटी के लिए लाइन में खड़े अमीर और गरीब लोग, भूख और जीवन संघर्ष को दर्शाता भावुक यथार्थवादी दृश्य।

सब लोग तेरे दीवाने

“सब लोग तेरे दीवाने” एक संवेदनशील हिंदी कविता है, जो रोटी के महत्व और भूख की पीड़ा को गहराई से व्यक्त करती है। यह कविता बताती है कि अमीर हो या गरीब, हर इंसान की पहली जरूरत रोटी ही है। जीवन के संघर्ष, इच्छाओं और हालातों के बीच रोटी की तलाश कभी खत्म नहीं होती। कवि ने सरल शब्दों में समाज की वास्तविकता, गरीबी और मानवीय जरूरतों को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कविता पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि रोटी केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।

Read More
कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

काली राख की बस्ती

कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

Read More