सिंदूर तेरे नाम का
“सिंदूर तेरे नाम का” प्रेम, विश्वास और आजीवन समर्पण की भावनाओं को व्यक्त करती एक भावपूर्ण हिंदी कविता है। इसमें जीवनसाथी के साथ जन्म-जन्मांतर के बंधन, अटूट विश्वास और साथ निभाने की कामना को कोमल शब्दों में पिरोया गया है। कविता भारतीय वैवाहिक संस्कृति में सिंदूर के आध्यात्मिक और भावनात्मक महत्व को भी सुंदरता से अभिव्यक्त करती है।
मन की औषधि: प्रार्थना
प्रार्थना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य और ईश्वर के बीच आत्मीय संवाद का माध्यम है। यह मानसिक शांति, आत्मविश्वास, कृतज्ञता और सकारात्मक सोच को विकसित कर जीवन को संतुलित एवं सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हिंदी महीनों के नाम
“हिंदी महीनों के नाम” एक सुंदर और शिक्षाप्रद बाल कविता है, जो चैत्र से फाल्गुन तक भारतीय पंचांग के बारह महीनों का सरल और रोचक परिचय देती है। प्रत्येक महीने को उससे जुड़े मौसम और प्रमुख त्योहारों के माध्यम से बच्चों के लिए यादगार बनाया गया है। यह कविता ज्ञान और संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
तेरी यादों का सैलाब
तेरी यादें जब भी उठती हैं तो सैलाब-सी बनकर मन को बहा ले जाती हैं। आँखों से आँसुओं के कतरे ढलते हैं, और हर कण में तेरा ही नूर झलकता है। तू अपनी जुल्फ़ों से बहारों को महकाती है, इंद्रधनुष-सी रंगीन चूनर लहराती है और चांदनी रातों को मधुशाला बना देती है। जितना तुझे भूलने की कोशिश करता हूँ, उतनी ही गहराई से तू याद आती है।
अगर मुड़ के देखे, जो तू मुझको एक बार…
कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।
विदाई गीत
आज विदाई का वह क्षण है, और मैं यहाँ अकेला खड़ा हूँ, यह सोचते हुए कि क्या कहूँ और शब्दों का सही चयन कैसे करूँ। मेरी आँखें भर आती हैं जब मैं अपने विद्यालय में पहले दिन की यादों को याद करता हूँ—वो उत्साह, वो नर्वसनेस, और दोस्तों के साथ की छोटी-छोटी शरारतें, जैसे क्लास में बंक मारना या किसी का टिफ़िन चुपके से ले जाना। वे निश्चिन्त, हँसी-खुशी भरे पल, दोस्तों के साथ की मस्ती, टीचरों को चिढ़ाना, खेल के मैदान और प्रार्थना की ध्वनि—ये सभी यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।
“झूठा गांव”
“झूठा गांव” एक भावनात्मक कहानी है जिसमें किताबों के सुंदर गांव और बाढ़ से जूझते वास्तविक गांव का अंतर दिखाया गया है। गंगा की भीषण कटान के बीच एक बच्ची के टूटते सपनों की मार्मिक प्रस्तुति पाठकों को भीतर तक झकझोर देती है।
मेघा, अब तो आओ
सूखी धरती मेघों को पुकार रही है. प्यासे खेत, तड़पते किसान और तपन से झुलसी दुनिया बादलों से जीवन-वर्षा की विनती करती हुई।
ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं
एक सुनसान और बरसों से बंद घर में लौटे व्यक्ति को खामोश दीवारों, पुरानी तस्वीरों और सीलन के बीच बीते जीवन की अनकही कहानियाँ सुनाई देने लगती हैं।
