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लहरों के बीच ठहरा मन

भावना गुप्ता महेंद्र, प्रसिद्ध लेखिका, पुणे

प्रकृति और मैं
सूरज की किरणों से

बादलों के आगोश में
समंदर की लहरों में

पक्षियों की चहचहाहट में
सुनना है मुझे आज खुद
को।

बरसों का जो कोलाहल है।
स्वयं मंथन की अनेक चरणों पर
स्वर्णिम किरणों का संदेश
पहुंच रहा है मुझ तक।

अब एक प्याला चाय का भी
अमृत सा लगता है मुझे।

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