gulmohar

लहरों के बीच ठहरा मन

प्रकृति की गोद में बैठकर वह खुद को सुनना चाहती है .सूरज की किरणों, बादलों के आलिंगन, समुद्र की लहरों और पक्षियों की चहचहाहट के बीच। वर्षों के भीतर जमा कोलाहल को पीछे छोड़ते हुए, आत्ममंथन की इस शांत यात्रा में अब एक साधारण-सी चाय की प्याली भी उसे अमृत-सी प्रतीत होने लगी है।

Read More