रियल लाइफ मर्दानी : मल्लिका बनर्जी
जब नौकरी के नाम पर बच्चे बेचे जा रहे थे और सिस्टम खामोश था, तब IPS मल्लिका बनर्जी ने वर्दी उतारकर अंडरकवर जंग लड़ी. यह कहानी सिर्फ़ बहादुरी की नहीं, भारत में फैली बाल तस्करी की कड़वी सच्चाई की है.

जब नौकरी के नाम पर बच्चे बेचे जा रहे थे और सिस्टम खामोश था, तब IPS मल्लिका बनर्जी ने वर्दी उतारकर अंडरकवर जंग लड़ी. यह कहानी सिर्फ़ बहादुरी की नहीं, भारत में फैली बाल तस्करी की कड़वी सच्चाई की है.
“नहीं, कभी नहीं।”“कभी नहीं?”“नहीं, कभी नहीं।”“सच में, कभी नहीं?”“हाँ, सच में कभी नहीं रोते।” हाँ, सच में मर्द कभी नहीं रोते… कहते-कहते आँखों से आँसू छलक पड़े, और उन छलकते हुए आँसुओं में रवानी कब आ गई, पता ही नहीं चला… मुझे नहीं पता कि मर्द पहली बार कब रोया!क्या जब खुदा ने आदम को…
भारत की गलियों में जब कोई बच्चा नीली आंखों के साथ मुस्कराता है या जब पर्दे पर ऋतिक रोशन, करिश्मा कोटक या निकोल फारिया जैसे सितारों की नीली आंखें चमकती हैं, तो एक सवाल हर किसी के मन में जरूर उठता है – “भारत जैसे सांवले-त्वचा प्रधान देश में ये नीली आंखें आखिर आई कहां से?”
‘बसा-बसाया घर’ एक ऐसी मार्मिक लघुकथा है, जिसमें बेटी अपने तलाक के फैसले पर अडिग रहती है। माता-पिता उसे समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बातचीत के दौरान वह उनके अतीत का ऐसा सच सामने रख देती है, जिससे दोनों निरुत्तर हो जाते हैं। कहानी रिश्तों में विश्वास, दोहरे मापदंड और आत्मसम्मान जैसे गंभीर विषयों को उजागर करती है। यह कथा बताती है कि दूसरों को सलाह देना आसान है, लेकिन जब सच सामने आता है तो अपने ही बनाए मूल्य टूट जाते हैं।
आज की युवा पीढ़ी पर अक्सर आलोचना की जाती है—संस्कारहीन, आधुनिक जीवनशैली में खोई, और नशे-जुए जैसी बुरी आदतों में फंसी। लेकिन एक बस यात्रा में 25 वर्षीय युवक से हुई बातचीत ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। युवक की ईमानदारी, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता देखकर पता चला कि नई पीढ़ी में भी सम्मान, समझ और संस्कार गहराई से भरे हैं। यह अनुभव न केवल प्रेरणादायक था, बल्कि सोचने पर मजबूर करने वाला भी।
वृन्दावन में यमुना नदी में हुआ नाव हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई, संचालकों की लापरवाही और जनता की अनदेखी का परिणाम है। यह घटना सामूहिक जिम्मेदारी और सुरक्षा के प्रति जागरूकता की जरूरत को उजागर करती है।
वक्त लौटकर आता हुआ दिखाई देता है, लेकिन उसके साथ बिछड़े लोग और बीते पल कभी वापस नहीं आते। ‘वक्त का पहिया’ समय, स्मृतियों और जीवन में आए बदलावों पर आधारित एक गहरी और भावुक हिंदी कविता है, जो पाठक को अपने अतीत से रूबरू कराती है।
आस्था और पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा का ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है। जब भक्ति सच्चे मन और निष्कपट भाव से की जाती है, तभी वह ईश्वर तक पहुँचती है। “आस्था एवं पूजा” कविता इसी सत्य को सरल और प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है।
दिल्ली में अमित शाह ने भारत टैक्सी लॉन्च की। ड्राइवर ‘सारथी’ कहलाएंगे, जीरो कमीशन मॉडल से किराया निजी कैब से 30% सस्ता होगा।