ग्रामीण स्त्री, श्रम और विस्थापन के प्रतीकों के साथ सामाजिक यथार्थ दर्शाती हिंदी कविता का दृश्य

वसंत नहीं लौटता

यह कविता बसंता और वसंत के प्रतीक के माध्यम से श्रम, विस्थापन और जीवन के असंतुलन को दर्शाती है। सौंदर्य, पर्यटन और संघर्ष के बीच का कटु यथार्थ इसमें मुखर है।

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संदूक भर जीवन

घर के पिछले कमरे में रखा वह पुराना संदूक अब एक वस्तु नहीं रहा, वह मानो माँ के जीवन की पूरी कथा समेटे बैठा है। उसमें मायके की यादें हैं, विवाह की रस्मों के निशान हैं, और मातृत्व के पहले क्षणों की सोंधी गंध अब भी बसी है। हर वस्तु, हर दस्तावेज़ किसी बीते समय की गवाही देता है — मनीऑर्डर का पन्ना, साइकिल की रसीद, गाँव का ढहता इतिहास।
माँ के झुर्रियों वाले हाथ जब उसे छूते हैं, तो उनमें फिर वही स्फूर्ति लौट आती है, जैसे वर्षों पीछे लौट गई हों। और मैं, उस संदूक को निहारते हुए, महसूस करती हूँ कि उसमें सिर्फ़ माँ का ही नहीं, मेरा भी जीवन धीरे-धीरे सिमट आया है — तस्वीरों, कपड़ों और दस्तावेज़ों के रूप में। यही तो है “संदूक भर जीवन।”

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टीआई पंवार का बड़ा कदम: ₹51,000 दान से समाज को दी प्रेरणा

टीआई मदन सिंह पंवार ने समाज सेवा की मिसाल पेश की

महिदपुर रोड में टीआई मदन सिंह पंवार ने श्मशान समिति को ₹51,000 की दान राशि देकर समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उनके इस कदम से न केवल विकास कार्यों को बल मिलेगा, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।

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जयपुर में आयोजित ब्रज रसिया होली कार्यक्रम में राधा-कृष्ण प्रस्तुति और रंगों के बीच नृत्य करते कलाकार

जयपुर में गूंजा “ब्रज रसिया”-होली के रंग.. कृष्णा के संग”

जयपुर में राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी एवं सम्पर्क संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “ब्रज रसिया – होली के रंग… कृष्णा के संग” कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। चार घंटे तक चले इस आयोजन में राधा-कृष्ण प्रस्तुति, फाग गीत, नृत्य और काव्य प्रतियोगिताओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को ब्रज भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना रहा।

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मध्य प्रदेश को ‘सर्वश्रेष्ठ राज्य पर्यटन बोर्ड’ पुरस्कार से नवाजा गया

मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (MPTB) को प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ राज्य पर्यटन बोर्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान 9 सितंबर को ले मेरिडियन, नई दिल्ली में आयोजित भव्य इंडिया ट्रैवल अवार्ड्स 2025 समारोह में केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री, श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा प्रदान किया गया। यह राष्ट्रीय स्तर की मान्यता मध्य प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में नवाचार, उत्कृष्टता और सतत विकास में नेतृत्व को दर्शाती है।

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डाक चाचा: पत्रों में बसी यादें

डाकिया हमारे बचपन और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। उनका नाम सुनते ही एक अलग ही दुनिया आंखों के सामने जीवंत हो उठती — खाकी वर्दी, साइकिल की खड़खड़ाहट और हाथों में थैला। वे सिर्फ़ पत्र और पार्सल नहीं लाते थे, बल्कि अपनों का प्यार, उम्मीद और आशीर्वाद भी अपने साथ लाते थे। इस लेख में हम उन दिनों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जब हर चिट्ठी का इंतजार दिल की धड़कनें बढ़ा देता था और हर पार्सल में खुशी और उत्सुकता समाई होती थी।

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पुणे: प्रॉपर्टी टैक्स अभय योजना बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज pmc building

पुणे: प्रॉपर्टी टैक्स अभय योजना बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज

पुणे नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स अभय योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने स्पष्ट किया कि मार्च के अंतिम 15 दिनों में विशेष प्रॉपर्टी टैक्स वसूली अभियान चलाया जाता है, इसलिए योजना की अवधि बढ़ाना उचित नहीं होगा। कांग्रेस गुटनेता द्वारा योजना बढ़ाने की मांग के बावजूद प्रशासन ने इसे स्वीकार नहीं किया

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माँ : जो हर अक्स में खुदा

माँ जो बिना कहे हर दुख समेट लेती है और हर सुख में चुपचाप पास खड़ी रहती है। माँ की उपस्थिति यहाँ दूरी से परे, स्मृति और आत्मा में रची-बसी हुई है—ऐसी शक्ति जो कभी जुदा नहीं होती।

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सूर्यास्त की हल्की सुनहरी रोशनी में खड़ा एक युवा दर्पण में मुस्कुराते हुए स्वयं को निहारता हुआ, प्रेम और आत्मविश्वास का प्रतीक

इश्क कीजिए

“इश्क कीजिए” एक कोमल और संवेदनशील हिंदी कविता है, जो दिल की उदासी, यादों की दस्तक और अनायास जन्म लेने वाले प्रेम के एहसास को शब्द देती है। यह कविता बताती है कि इश्क केवल किसी और से नहीं, बल्कि खुद पर विश्वास रखने का भी नाम है।

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एक छोटी लड़की चूल्हे और किताबों के बीच खड़ी, पढ़ाई और अपने सपनों की ओर बढ़ने की इच्छा दर्शाती हुई।

चूल्हे से किताब तक

खुशबू गोयल माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न।नहीं पकड़नी ये करछी मुझको,ज़रा कलम तो पकड़ाओ न। भैया भी तो पढ़ने जाता है,मुझको भी तो पढ़ाओ न।माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न। मेरे भी तो सपने हैं,करने उनको अपने हैं।मत सुलगाओ चूल्हे की अग्नि में मुझको,विद्यालय…

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