आओ ज़रा जी लें

कविता में छिपे भाव जीवन की छोटी-छोटी खुशियों और अनदेखे लम्हों की याद दिलाते हैं। नीरसता और उदासी में भी हम अपने भीतर की रौशनी को खोज सकते हैं। यादों में मुस्कुराते हुए लम्हे, जीवन के कठिन समय में भी राहत और उत्साह की ठंडी हवा बनकर हमारे मन को सहलाते हैं। ये लम्हे हमें याद दिलाते हैं कि हर पल एक कविता है, जो जीवन की महाकाव्य रचना में नए छंद जोड़ती है। इसे जीना, उसे महसूस करना और हर पल को उत्सव में बदल देना ही जीवन की असली खुशी है।

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राजगीर जैन धर्मशाला में बंद कमरे से मिले चार जैन पर्यटकों के शव

राजगीर की शांत धार्मिक नगरी में चार मौतों का रहस्य

बौद्ध और जैन आस्था के लिए प्रसिद्ध राजगीर की शांत धार्मिक नगरी शुक्रवार को उस वक्त सन्नाटे में बदल गई, जब दिगंबर जैन धर्मशाला के एक कमरे से चार पर्यटकों के शव बरामद किए गए. अंदर से बंद कमरे में दो पुरुष और दो महिलाओं के शव फंदे से लटके मिले.

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हल्की बारिश में सूर्यास्त के समय खड़े प्रेमी युगल का भावनात्मक दृश्य

प्रेम का आगमन

“प्रेम का आगमन” एक ऐसी भावनात्मक कविता है जो प्रेम के प्रथम स्पर्श की सुगंध, मिलन की उजली आभा और विरह की गहरी पीड़ा तीनों अवस्थाओं को संवेदनशील शब्दों में चित्रित करती है। यह रचना बताती है कि प्रेम जीवन में उजाला और पूर्णता लाता है, परंतु बिछड़ने पर वही स्मृतियाँ आत्मा को झकझोर देती हैं। प्रेम की मधुरता और उसके बाद की रिक्तता का यह मार्मिक चित्रण पाठक के हृदय को छू जाता है।

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जीवन के विभिन्न भावनात्मक रंगों को दर्शाता होली का दृश्य

रंगों से सजी ज़िंदगी

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद रंग ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।जीवन में हर रंग अपनी अहमियत दर्ज कराने समय-समय पर चला आता है। अमूमन हम नीले, पीले, हरे और सबसे पुराने रंगगुलाबी के बारे में जानते हैं। रंग ज़िंदगी में हों या शब्दों में… वे खुद को बयां कर ही देते हैं। आइए जानते हैं,…

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बदलता गणपति उत्सव : भक्ति से दिखावे तक

गणपति बप्पा मोरया!….

यह जयघोष जब गूंजता है तो वातावरण भक्तिभाव से भर उठता है. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने जब 1893 में मुंबई में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा शुरू की थी, तब इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक और राजनीतिक उद्देश्य था. गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतवासियों को एकजुट करने और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना जगाने का यह एक सशक्त माध्यम बना. उस दौर में गणेशोत्सव ने समाज को जोड़ने, समानता और भाईचारे का संदेश देने का काम किया.

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फैक्ट्री गेट पर खड़ा थका हुआ गार्ड, झुकी कमर और उदास चेहरा

बंद दरवाज़ा

“बंद दरवाज़ा” एक मेहनतकश इंसान की कहानी है, जो रोज़ी-रोटी के संघर्ष में अपने सपनों को दबा देता है, लेकिन फिर भी उम्मीद के जुगनू उसकी आँखों में टिमटिमाते रहते हैं।

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चूरन वाली चाची

विद्यालय के बाहर छोटी-सी दुकान लगाए बैठी चूरन वाली चाची जी बचपन की सबसे मीठी यादों में से एक हैं। झरबेरी के रंग-बिरंगे बेर, गुड़ वाली लाल इमली, संतरे वाला कम्पट और नमक लगा कमर उनका हर स्वाद मानो बचपन की जेब में छुपी खुशी जैसा। न दिखावा, न चालाकी बस सादगी, अपनापन और शुद्ध स्वाद का भरोसा। सच में, पूरे दिल से भोली-भाली थीं चूरन वाली चाची जी।

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मन का मधुबन

संत पवन के आगमन से मन का मधुबन महक उठा है कलियों की आँखें खुलीं, भंवर गूंजे, तितलियाँ थिरकीं और कोकिला के गीतों से आँगन भर गया। पतझड़ की थकान भूलकर प्रकृति फिर से उत्सव में ढल गई।

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ठहर न सका वो प्रेम

सुबह का नशा धीरे-धीरे चढ़ा तो था, लेकिन शाम तक उतर गया। यह प्रेम भी कुछ वैसा ही था—जिसे टिकना चाहिए था, पर ठहर न सका। अजीब बात यह रही कि उसे भी तलाश थी और मुझे भी, लेकिन जब वह सामने खड़ा था, तब भी पता नहीं क्यों वह न जाने कहाँ गुम हो गया।

इसके बाद न कोई तलब बची, न कोई बेक़रारी। सब कुछ जैसे अचानक खत्म हो गया और मेरे भीतर की बेचैनियों को किसी ने एक ही पल में कुतर डाला। मुझे याद है, शायद वह कोई फकीर ही रहा होगा, जिसकी उपस्थिति ने मेरे मन को इस कदर सँवार दिया कि सब कुछ बदल गया।

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खंडवा में राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी और डॉ. मुनि श्री शांतिप्रिय सागर जी के तीन दिवसीय विराट सत्संग प्रवचन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित

राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभजी का पावन आगमन

खंडवा में 14 से 16 जनवरी 2026 तक राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी और डॉ. मुनि श्री शांतिप्रिय सागर जी के पावन सान्निध्य में पुरानी अनाज मंडी, रामकृष्ण गंज में तीन दिवसीय विराट सत्संग प्रवचन समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें जीने की कला पर प्रेरणादायी मार्गदर्शन मिलेगा.

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