प्रेम होने तो दो
प्रेम की कथा इतनी सरल नहीं कि शब्दों में बाँधी जा सके। “धरती सब मसि कियो, लेखनी सब बनराई”—यह यूँ ही नहीं लिखा गया। जब प्रेम को लिखना चाहा, तो लेखनी ने हार मान ली। उसमें धूल, राख और व्यापार की कठोरता निकल पड़ी। क्योंकि प्रेम में कोई सौदा नहीं होता, कोई मोल नहीं होता।
कभी प्रेम में एक महामौन था, जिसमें न मिलने का डर था, न खोने का भय। स्त्री अपने घर की नींव संभालने आई, पुरुष घर को भरने कमाने निकला। पर प्रेम की अनुगूँज बहती रही—नदियों में, झरनों में, लहरों में, हवाओं में… बिना कहे, बिना सुने।
जो प्रेम को अभिशाप कहकर कोसता है, वह भी जानता है कि प्रेम होना ही सबसे बड़ा वरदान है। लेकिन प्रेम करने से पहले, उसे समझना, महसूस करना, जीना आना चाहिए।
उस दोपहर..
कभी-कभी जीवन में सबसे बड़ा संघर्ष बाहर की दुनिया से नहीं, बल्कि अपने भीतर के खालीपन से होता है। “पटरी के उस पार” एक ऐसी ही कहानी है, जो एक नवविवाहिता के मन के उस सूनेपन को उजागर करती है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता।
स्वच्छ ऊर्जा की ओर मजबूत कदम
भारतीय रेलवे ने सकलेशपुर–सुब्रमण्य रोड घाट सेक्शन का विद्युतीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल की है. यह रेलखंड भारतीय रेलवे के सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है. 28 दिसंबर 2025 को इस सेक्शन पर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का सफल ट्रायल किया गया, जिसके बाद यह खंड इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है.
सच में वही दीपावली होगी
ज्योति सोनी “वैदेही ” अलवर ,राजस्थान दीपावली, अंधेरे रूपी शत्रु के विरोध में सैकड़ों दियों की क्रांति का त्यौहार है। किस तरह नन्हे-नन्हे दिए, अपने साहस को समेटकर पूरी शक्ति और हिम्मत से उस अंधेरे को चीरते हुए धीरे-धीरे जलते हैं, जिसने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है। उस कमजोर सी बाती में कितनी…
अस्पताल के पास
यह कविता अस्पताल जैसे गंभीर माहौल में भी उम्मीद, संवेदना और जीवन के छोटे-छोटे रंगों की आवश्यकता को बेहद भावपूर्ण तरीके से व्यक्त करती है।
चलते रहने का नाम ज़िंदगी
क़तर में अकेली ज़िंदगी जी रही मान्या परिवार की जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल चुकी थी। तन्हाई, पुराने प्रेम की स्मृतियाँ और नए रिश्ते के डर के बीच जब जीवन ने उसे प्रेम का दूसरा अवसर दिया, तब उसे समझ आया कि चलते रहने का नाम ही ज़िंदगी है।
आईआईएम लखनऊ ने मनाया 41वां स्थापना दिवस
आईआईएम लखनऊ ने अपना 41वां स्थापना दिवस मनाते हुए शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक समावेशन का संदेश दिया। इस अवसर पर आईएएस नेहा प्रकाश ने बतौर मुख्य अतिथि नेतृत्व और सहानुभूति की भूमिका पर प्रकाश डाला। वृक्षारोपण, खेल स्पर्धाएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पुरस्कार वितरण जैसी गतिविधियों से आयोजन को यादगार बनाया गया।
तुम खो गए हो
यह ग़ज़ल एक ऐसे प्रेम की कहानी कहती है, जो साथ चलते-चलते कहीं खो गया। इसमें यादों की टीस, अधूरी मुलाकातें और इश्क़ की सच्चाई को बेहद मार्मिक तरीके से व्यक्त किया गया है। हर पंक्ति दिल के किसी कोने को छू जाती है और पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ देती है।
दौड़ते-दौड़ते कहीं ज़िंदगी पीछे न छूट जाए
प्रतिस्पर्धा, पैसा कमाने की होड़ और डिजिटल दुनिया ने इंसान को अपनों से दूर कर दिया है. ऐसे में जरूरी है कि हम भागती जिंदगी से थोड़ा वक्त निकालें, रिश्तों को समय दें और तनाव के बजाय सुकून को चुनें.
