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राघव और रिद्धिमा की लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में फोन पर भावुक बातचीत का दृश्य।

अधूरी परवाह

क्या रिश्ते सचमुच बड़े वादों से चलते हैं, या फिर एक छोटा-सा संदेश-“खाना खाया?”, “घर पहुँच गए?” और “मैं तुम्हारे साथ हूँ” उन्हें ज़िंदा रखता है? पढ़िए राघव और रिद्धिमा की भावुक प्रेम कहानी, जो बताती है कि लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में प्यार की सबसे बड़ी ताकत छोटी-छोटी परवाह और रोज़मर्रा की आदतों में छिपी होती है।

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“कभी खुद के लिए भी जी ले माँ…”

जाने हमेशा ऐसा क्यों लगता है सारे असंभव काम आप ही कर सकती हो… जादुई सी बेतरतीब से बंधे माँ के जूडे से हमेशा बाल की एक पतली सी लट छूट जाया करती थी, जो पसीने से गर्दन में चिपकी रहती। इतनी गर्मी में रोटियां बनाते हुए माँ पसीने से नहा उठती। सब काम निपटा…

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सिंहस्थ 2028: उज्जैन में माइक्रो-लेवल प्लानिंग

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ माइक्रो-लेवल प्लानिंग के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। 4 नवंबर 2025 को मीडिया संवाद सत्र में पत्रकारों ने प्रोजेक्ट्स की गति देखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सराहना की। संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन सिंह ने शिप्रा जल संरक्षण और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रमुख कार्यों की प्रेज़ेंटेशन दी।
₹614.3 करोड़ का सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट शिप्रा को सालभर प्रवाहमान रखने की तैयारी में है और 2027 मानसून तक इसका परीक्षण प्रस्तावित है। वहीं ₹919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट योजना शिप्रा में गंदा पानी मिलने को पूरी तरह रोक देगी। सिंहस्थ के लिए 29 किमी घाट, नया फोरलेन MR-22 और 19 नए पुल तेजी से बन रहे हैं।

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चिट्ठी उनके नाम की कविता

चिठ्ठी उनके नाम की

एक खूबसूरत हिंदी कविता “चिट्ठी उनके नाम की” जिसमें यादें, प्रेम और भावनाओं की गहराई को शब्दों में पिरोया गया है। दिल को छू लेने वाली यह कविता

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विश्व में हिंसा और होली के विरोधाभास को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य

जब रंग हुए लाल

यह कविता विश्व में फैलती हिंसा, नकली व्यवहार और टूटते मानवीय मूल्यों पर तीखा प्रश्न उठाती है। होली और रमज़ान जैसे पावन अवसरों के बीच खून-खराबे की विडंबना को उजागर करती एक मार्मिक सामाजिक रचना।

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बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड पर अब फिल्म बनेगी

इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड पर अब फिल्म बनने जा रही है। फिल्म का नाम फिलहाल ‘हनीमून इन शिलॉन्ग’ रखा गया है, जिसका निर्देशन करेंगे एस.पी. निंबावत। मंगलवार को वे इंदौर पहुंचे और राजा रघुवंशी के परिजनों से मुलाकात कर अधिकारिक अनुमति ली।

परिवार को उम्मीद है कि इस फिल्म के ज़रिए मेघालय की बिगड़ी हुई छवि सुधरेगी। फिल्म की 80% शूटिंग इंदौर में और 20% शूटिंग शिलॉन्ग में की जाएगी।

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संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी का दिव्य आगमन

डॉ प्रेरणा मनाना, पूर्व निदेशक आरडी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, लेखिका स्तंभकार इंदौर- भारतीय संत परंपरा के महानतम व्यक्तित्वों में से एक, संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी, बुधवार को हमारे निवास स्थान पधारे। उनके आगमन से पूरा वातावरण दिव्यता, शांतिपूर्ण ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। संत श्री अभिराम दास जी त्यागी न केवल एक…

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शक्ति हो माँ

माँ, तुम ममता की मूर्ति हो, धीरज और करुणा का अथाह सागर। तुम्हारे आगे शब्द भी छोटे पड़ जाते हैं। आकाश तुम्हें नमन करता है और धरती तुम्हारी आरती उतारती है। जीवन के हर सुख-दुख में तुम्हारा हाथ थाम लेने से मन को संबल मिलता है। मेरी प्रत्येक साँस तुम्हारी ही देन है, हर क्षण तुम्हारे ध्यान में ही बीतता है।

जब-जब मन डगमगाता है, आँखों में तुम्हारा रूप बसाकर स्थिरता मिलती है। तुम्हारे चरणों में सिर झुकाना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। अंतिम क्षणों में भी यदि तुम्हारे दर्शन मिल जाएँ तो जीवन सार्थक हो जाएगा।

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मेरा घर कौन-सा…?

यह कविता एक स्त्री की आत्मसंवेदना और उसके भीतर के संघर्ष का मार्मिक चित्रण करती है। वह बताती है कि कैसे समाज और परिवार की परंपराओं के बीच जीते-जीते वह स्वयं अपने ही घर में पराई बन जाती है। मन की पीड़ा इतनी गहरी है कि वह धीरे-धीरे उस “गैरपन” की स्थिति की अभ्यस्त हो जाती है — जैसे किसी ने अपनी पहचान को कुहासे में ब्याह दिया हो।
कविता में “एक धुंध से निकलकर दूसरी धुंध में” जाना, जीवन की निरंतर उलझनों और अस्पष्टताओं का प्रतीक है। वर्जनाओं से घिरी हुई स्त्री फिर भी अपनी “कामनाओं” को निर्बाध बहने देती है, क्योंकि वही उसकी जीवंतता का प्रमाण हैं। अंत में “मेरा घर कौन-सा…?” यह प्रश्न केवल भौतिक घर का नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और आत्मीयता की खोज का प्रतीक बन जाता है। यह कविता स्त्री-मन की उस पीड़ा को उजागर करती है, जो प्रेम, संबंध और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच अपनी पहचान तलाशने का प्रयास कर रही है।

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मेरु त्रयोदशी व्रत से मोक्ष पथ की साधना

महिदपुर रोड पर पूज्य साध्वी श्री चारित्रकला जी म.सा. की पावन निश्रा में बरडिया परिवार द्वारा मेरु तेरस तप की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। घी के मेरु के साथ तपस्वी ने नगर में जयघोष करवाए और जैन समाज के लोग धर्मलाभ प्राप्त किए।

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