“जिद से पहचान”
बदनाम से पहचान तक” एक गहरी भावनात्मक हिंदी ग़ज़ल है, जो इंसान के संघर्ष, आत्मसम्मान और समाज की बदलती सोच को दर्शाती है। यह ग़ज़ल बताती है कि जीवन में बदनामी या असफलता अंत नहीं होती, बल्कि वही हमारे लिए एक नई पहचान बनाने का अवसर बनती है। आज के दौर में जब लोग अक्सर दूसरों के बारे में जल्दी राय बना लेते हैं, यह रचना हमें धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास का महत्व सिखाती है।
विशालता की छाया में दम तोड़ता विकास
यह लेख हमारे समय के उस भ्रम को उजागर करता है जिसमें “बड़े होने” को ही “बेहतर होने” का पर्याय मान लिया गया है, और बताता है कि कैसे यही सोच नई प्रतिभाओं और अवसरों को दबा देती है।
जीवन: वह रंगमंच, जिसमें हर उम्र होती है खास
यह लेख जीवन के विभिन्न पड़ावों बचपन, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था के माध्यम से बताता है कि हर उम्र अपने आप में खास होती है और हमें जीवन को समझने का एक नया दृष्टिकोण देती है।
बेबी को बेस पसंद है
स सिर्फ़ आवाज़ नहीं होता, वह एक जुनून होता है। टेपरिकार्डर, कैसेट और जुगाड़ से पैदा हुआ वह गूंजता बेस, जो साधारण मशीन को भी महफिल बना देता था। मटके पर उल्टा रखा स्पीकर सिर्फ़ प्रयोग नहीं था, वह उस दौर की रचनात्मक ज़िद थी जहाँ साधन कम थे, पर शौक़ और शरारत दोनों भरपूर थे। और हाँ, घर से थोड़ी दूर रहने वाली ‘बेबी’ को भी वही बेस पसंद था।
डोर जो बंधी है
रिश्तों की उलझनों और आत्मविश्वास की तलाश के बीच झूलती यह कहानी दो बहनोंकनु और मन्नी—की है, जहाँ एक की कठोर सच्चाई दूसरी के टूटते हौसले को फिर से जोड़ने की कोशिश करती है। क्या मन्नी अपनी खोई हुई पहचान और आत्मविश्वास वापस पा सकेगी?
वैलेंटाइन वीक ट्रेंड नहीं, रिश्तों की समझ
वैलेंटाइन वीक को अब तक केवल दिखावा समझा जाता रहा है, लेकिन रिश्तों की बदलती समझ में इसका एक नया अर्थ सामने आया है. Rose Day से लेकर Valentine’s Day तक, इस पूरे सप्ताह का हर दिन अलग-अलग love language को दर्शाता है, जो यह बताता है कि लोग प्यार को महसूस और व्यक्त कैसे करते हैं. यही वजह है कि युवा वर्ग के बीच वैलेंटाइन वीक अब भावनाओं को समझने और रिश्तों को मजबूत करने का एक आधुनिक माध्यम बनता जा रहा है.
जन्म कल्याणक महोत्सव में भक्ति में डूबा महिदपुर रोड
महिदपुर रोड में भगवान नेमिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ. गिरनार तीर्थ की प्रतिकृति, शक्रस्तव अष्टोत्तरी महाभिषेक, 14 महास्वप्नों की प्रस्तुति और भक्ति नृत्य ने आयोजन को विशेष बना दिया.
