
विजया डालमिया, हैदराबाद
तेरा एहसास बनारसी
पान-सा,
मेरा दिल बरेली के
बाज़ार-सा।
तेरा आना सावन की
घटाओं-सा,
मेरा झूमना बसंती
बयार-सा।
तेरा साथ धड़कती
साँसों-सा,
मेरा प्यार चंदन के
वृक्ष-सा।
तेरी आँखों का पानी
अस्सी के घाट-सा,
मेरी आँखें बनीं
मणिकर्णिका घाट-सी।
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वाह