
बिट्ट जैन सना, प्रसिद्ध कवयित्री, मुंबई
काम आई न दिल्लगी दिल की।
ये कभी क्या हुई किसी दिल की।
इश्क़ वालों के साथ ही अक्सर।
ज़ेह्न से दुश्मनी हुई दिल की।
आशिक़ी में है सिर्फ़ आह-ओ-फ़ुग़ाँ,
कब हुई किसको आगही दिल की।
दिल हमेशा जवान रहता है,
उम्र बढ़ती नहीं कभी दिल की।
आज उस दिलरुबा को देखा तो,
ख़ुद-ब-ख़ुद खिल गई कली दिल की।
काम उसने लिया दिमाग़ से जब,
चाल बिल्कुल नहीं चली दिल की।
जिस से लग जाए उसका हो जाए,
सिर्फ़ इतनी है ज़िन्दगी दिल की।
