gulmohar
शून्यता और अकेलेपन को दर्शाता एक व्यक्ति, जो विचारों के सागर में खोया हुआ है

मुझमें कुछ भी नहीं है जिंदा..

आज के दौर में, जब हर व्यक्ति भीड़ का हिस्सा बनता जा रहा है, उसकी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से ही है। “शून्यकाल” कविता इसी आंतरिक संघर्ष और अस्तित्व की खोज को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है। कविता में ‘मैं’ का पात्र खुद को खाली और शून्य महसूस करता है, जहाँ शब्द तो हैं, पर उनके पीछे कोई ठोस अर्थ नहीं बचा।

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ख़त : सैनिकों के नाम

सीमाओं पर खड़ा सैनिक सिर्फ़ बंदूक नहीं थामे होता, वह अपने घर, अपने बच्चों की हँसी और माता-पिता की आँखों की प्रतीक्षा भी वहीं छोड़ आता है। सर्दी, गर्मी और बरसात उसके लिए मौसम नहीं, कर्तव्य की परीक्षा होते हैं। देश की शान उसके कदमों में और भारत की नींद उसकी आँखों की जाग में सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि हर दुआ, हर नमन और हर उम्मीद सबसे पहले उसी के नाम लिखी जाती है।

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जीवन चक्र और अंतिम विदाई

50 वर्षों का साथ, सुख-दुख की साझेदारी और परिवार की खुशियाँ — सब एक क्षण में बदल जाती हैं जब जीवन साथी इस संसार से विदा हो जाता है। यह अनुभव अकेलेपन, स्मृतियों और जीवन के चक्र की गहनता को सामने लाता है। इस लेख में हम एक पति के दृष्टिकोण से उस अंतिम विदाई और जीवन के अनुभवों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक परिवार और बच्चों के लिए समर्पण किया।

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सुबह की रोशनी में दीवार के कोने में जाल बुनती मकड़ी, पास में खिड़की से आती हल्की धूप

उम्मीद के जाल में उलझी मैं

“हां……
यही तो करती हूँ मैं भी हर दिन ….
हर सुबह मैं भी तो ढेरों उम्मीद,
कुछ ख्वाबों-ख्वाहिशों का लेकर
ताना-बाना,
बुनने लगती हूँ अनवरत
एक जाल भीतर अपने l”

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पहले झगड़े थे, आज दूरी

हर इंसान अलग है उसकी सोच, सहने की क्षमता, बोलने का तरीका और चुप्पी की भाषा भी अलग होती है। फिर भी हम एक-दूसरे में खामियाँ खोजने लगते हैं और यही खामियाँ धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बना देती हैं। आज परिवार छोटे हो गए हैं, लेकिन दिलों के फासले बढ़ गए हैं। जहाँ पहले प्रेम और सम्मान झगड़ों पर भारी पड़ते थे, आज अहंकार और असहिष्णुता रिश्तों को तोड़ रही है। साथ रहते हुए भी अकेले हो जाना, शायद हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी है।

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उठो, जागो

स्वामी विवेकानंद जयंती पर प्रस्तुत यह कविता युवाओं को निडर बनने, लक्ष्य के प्रति सजग रहने और अपने भीतर ईश्वर को पहचानने का संदेश देती है। सेवा, त्याग और मानवता के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण की प्रेरणा इसमें निहित है।

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महिदपुर रोड में बहेगी संगीतमयी श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा

26 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलेगा सात दिवसीय धार्मिक आयोजन सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे महिदपुर रोड- प्रस्तावित श्रीराम हनुमान मंदिर, महिदपुर रोड पर आगामी 26 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक भव्य एवं संगीत मयी श्रीमद्? भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है. कथा प्रवचन का दायित्व सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता…

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किशोरावस्था की मानसिक उलझन और मध्यांतर की अवस्था को दर्शाती संवेदनशील हिंदी कविता

अदृश्य पहरा

यह कविता न बचपन और न जवानी की उस मध्यांतर अवस्था को स्वर देती है, जिसे किशोरावस्था कहा जाता है। बदलती आदतों, माता-पिता की अपेक्षाओं और सामाजिक दबावों के बीच फँसे किशोर मन की उलझन और पीड़ा को यह रचना संवेदनशील ढंग से अभिव्यक्त करती है।

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वैवाहिक समारोह में पार्ट टाइम काम करता होटल मैनेजमेंट का मेहनती युवा

नयी उम्मीद

एक वैवाहिक समारोह में मिले मेहनती युवक की प्रेरक कहानी, जो होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर रहा है. यह कहानी आज के युवाओं के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है.

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रोटी की दास्तान

एक पिता जिसने बच्चों के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी, वही बुढ़ापे में भावनात्मक उपेक्षा का शिकार हो जाता है। “रोटी की दास्तान” रिश्तों की सच्चाई को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

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