Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

मुझे ऐतराज़ है…

यह लेख कैशलेस दौर के बीच घरेलू महिलाओं की उन छोटी-छोटी खुशियों को स्नेहिल व्यंग्य के साथ सामने रखता है, जो डिजिटल भुगतान की सुविधा में कहीं खो गई हैं। पति-पत्नी के साधारण संवाद के माध्यम से लेखिका स्मृतियों, आत्मसम्मान और भावनात्मक अधिकारों की बात करती हैं—जहाँ पति केवल जीवनसाथी नहीं, बल्कि भरोसेमंद “एटीएम” भी हुआ करते थे।

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इंतजार में अमृता प्रीतम…

यह रचना अमृता प्रीतम, साहिर और इमरोज़ की अमर प्रेमकथा की संवेदनाओं को छूती है। लेखिका के अंतर्मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या स्वयं वह अमृता जैसी हो सकती है, जिसे साहिर का अल्हड़ किन्तु अनकहा प्रेम मिला और इमरोज़ का निःस्वार्थ साथ। प्रेम की यह त्रयी—अनकहे भाव, निस्वार्थ समर्पण और अनंत प्रतीक्षा—मानव हृदय के उस गूढ़ कोने को उजागर करती है जहाँ प्रेम अपनी सीमाओं और परिभाषाओं से परे जाकर केवल “होने” में अर्थ पाता है। यही सोच अमृता को कालजयी बनाती है और यही प्रश्न आधुनिक मन को बेचैन करता है—क्या अब भी ऐसा दुर्लभ प्रेम संभव है?

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किराए की खुशियाँ

कभी-कभी हम ऐसी खुशियों का इंतज़ार करते रहते हैं, जो हमारी ज़िंदगी में किराए की तरह आती हैं. कुछ समय रुकती हैं और फिर चली जाती हैं। हम जानते हैं कि वे स्थायी नहीं हैं, फिर भी दिल उन्हें पाने की उम्मीद करता रहता है। इस रिश्ते में भी यही हुआ। ख़ामोशी हमारी भाषा थी, नज़रें संवाद थीं, और उम्मीद हमारा सहारा। हमने अपनी ओर से सब कुछ दाँव पर लगा दिया, लेकिन साथ नहीं मिला। अब वही इंसान, जिसके साथ एक घर बसाने का सपना था, हर बात पर तकरार करता है, और बेरुख़ी को स्वीकार करता है जैसे ये उसकी नई आदत हो।

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एक व्यक्ति ध्यान में बैठा हुआ, अंधकार से प्रकाश की ओर बदलता वातावरण, आत्मचिंतन का प्रतीक

मंथन

“मंथन” एक गहन और विचारोत्तेजक हिंदी कविता है, जो वर्तमान समाज की विसंगतियों और मानवता के गिरते मूल्यों पर गंभीर प्रश्न उठाती है। यह कविता केवल समस्याओं को उजागर नहीं करती, बल्कि आत्मचिंतन और सुधार की दिशा में एक सशक्त संदेश भी देती है।

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गुरु की शरण सौभाग्य का द्वार – पं. राजरक्षितविजयजी

श्री संभवनाथ जिनालय, पुणे में आयोजित गुरु पूर्णिमा प्रवचन में पं. राजरक्षितविजयजी ने कहा – “संपत्ति भाग्य से मिलती है, लेकिन सद्गुरु सौभाग्य से मिलते हैं।” उन्होंने गुरु की सेवा को भगवान की सेवा से भी श्रेष्ठ बताया और जीवन में सद्गुरु के मार्गदर्शन की अनिवार्यता पर बल दिया।

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हर कदम, स्वच्छता की ओर

भारत को स्वच्छ बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति मिलकर कदम बढ़ाए और दिल से प्रयास करे तो कचरा चुनकर, गीले और सूखे कचरे को अलग रखकर हम अपने देश को स्वच्छ बना सकते हैं। शुद्ध हवा और निर्मल पानी हमारे जीवन के लिए अनिवार्य हैं, इसलिए प्रदूषण को रोकने और जल की प्रत्येक बूँद को बचाने का संकल्प लेना होगा। प्लास्टिक का उपयोग कम करना, कपड़े की थैली अपनाना और वृक्ष लगाना जैसे छोटे-छोटे कदम पर्यावरण को बचा सकते हैं। यदि हम सब मिलकर यह अभियान चलाएँ तो धरती को हरी-भरी दुल्हन की तरह सजा सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित भारत बना सकते हैं।

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नौतपा की तपती दोपहर में धूप से झुलसी सड़क, गर्म हवाएं और गर्मी से बचाव के पारंपरिक पेय दर्शाता दृश्य

नौतपा

नौतपा की तपती दोपहरी, लू की मार और गर्मी से राहत के घरेलू उपाय इन सबको सरल लोकभाषा और सहज भाव में प्रस्तुत करते ये दोहे मौसम का चित्र भी उकेरते हैं और सावधानी का संदेश भी देते हैं।

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कपिल शर्मा और किकू शारदा 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' के दौरान.

‘कपिल शो’ का सीक्रेट आउट !

द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ को लेकर किकू शारदा ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि शो का करीब 70% हिस्सा स्क्रिप्टेड होता है, जबकि 30% कॉमेडी मौके पर इम्प्रोवाइज की जाती है. साथ ही सलमान खान और कपिल शर्मा की कॉमिक टाइमिंग पर भी दिलचस्प बातें साझा कीं.

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शब्दों का आचरण

यह लघुकथा ज्ञान और आचरण के अंतर को उजागर करती है। जो ऋषि संसार को करुणा का उपदेश देता है, वही अपने घर में उसे जी नहीं पाता। अंततः शब्दों की खोखली चमक टूटती है और सच्चे आत्मबोध का जन्म होता है पर एक अपूरणीय क्षति के साथ।

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महिला दिवस पर विचारों और आत्मविश्वास को दर्शाती प्रेरक हिंदी कविता

जब विचारों से पहचान बनने लगे

यह प्रेरक महिला दिवस कविता बताती है कि असली सशक्तिकरण बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि विचारों, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता में है। जब स्त्री अपनी पहचान खुद तय करने लगे और जीवन को संभावनाओं के विस्तार की तरह जीने लगे, तभी महिला दिवस सार्थक होता है।

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