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बे-इख़्तियार मोहब्बत

मोहब्बत अजीब है…जिन्हें हमारी कद्र नहीं, हम वहीं अपनी रूह रख आते हैं।हम उनके लिए हर लम्हा ख़यालों में सुलगते रहते हैं,और वो हमारी बे-ख़ुदी की ख़बर तक नहीं लेते। शिकायत भी नहीं कर सकते…क्योंकि इश्क़ में इख़्तियार हमारा होता ही कहाँ है।

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रात में अपनी सोती हुई बेटी को देखते हुए चिंतन में डूबी महिला आईपीएस अधिकारी

ज़िम्मेदारियां अपनी-अपनी

एक सफल आईपीएस अधिकारी की ज़िंदगी का वह मोड़, जहाँ कर्तव्य, मातृत्व, परिवार और भविष्य की चिंता आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। यह संवेदनशील कहानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता के कठिन निर्णयों पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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मनचाहे रंग…

वह चित्रकार थी, लेकिन कभी अपने चित्त और आत्मा के अनुरूप पूरी तरह नहीं रंग भर पाई। समाज उसे “बेचारी” कहता था। तब वह कृष्ण के सारथी की तरह अपने रथ को चलाती थी। अब वह स्वतंत्र है—बे लगाम घोड़े दौड़ाती है, वरदान मांगती है, और उपकार के बदले कुछ चाहती नहीं। आसमान नीला नहीं, धरती बंजर और पानी सूखा है, फिर भी वह अपने मनचाहे रंग अपनी आत्मा में भरती है, चाहे वह गणितीय नियमों के आधार पर हों। आज वह अब बेचारी नहीं, बल्कि वैचारगी और सशक्तता का प्रतीक है।

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गर्म दोपहर में पेड़ की शाख पर बैठी एक छोटी चिड़िया, जो पेड़ की छाया और प्रेम में सुकून से सो रही है।

प्रेम

‘प्रेम’ एक छोटी लेकिन गहरी संवेदनाओं से भरी कविता है। पेड़ और चिड़िया के माध्यम से यह कविता बताती है कि सच्चा प्रेम शब्दों का नहीं, बल्कि मौन समर्पण, संरक्षण और अपनत्व का नाम है। प्रकृति के प्रतीकों में जीवन का सबसे सुंदर रिश्ता यहाँ सहजता से उभरता है।

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अम्माजी…

जयपुर में किराये के घर के नीचे रहने वाली 80-85 साल की अम्माजी ने मुझे दोस्त बना लिया था। हिसाब-किताब में पक्की, आवाज़ में रौब — और उम्र में अद्भुत ताक़त। बेटियाँ पास थीं, बेटा विदेश में पर उनके मन में सबसे बड़ी खाली जगह बेटे ने ही छोड़ी थी। वह मुझे बहाने से बुलातीं, गाने सुनातीं, और कहतीं “बात कर लिया करो, अच्छा लगता है।”
दिवाली से ठीक पहले वह बाथरूम में गिर गईं। ऑपरेशन हुआ। बेटियाँ दौड़-भाग में, और एक्सरसाइज़ मेरा काम। irritation भी होती थी, पर उनसे मोह भी हो गया।

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द्रौपदी–कृष्ण संवाद: “विश्वास का वस्त्र

द्रौपदी–कृष्ण संवाद

द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।

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 सोच बदल गई

कभी-कभी हमारी भलाई की सोच भी सामने वाले के लिए बोझ बन जाती है. नीलम ने यह समझा कि उपहार की कीमत से ज़्यादा उसकी गरिमा और अपनापन मायने रखता है. सीमा के एक सधे हुए उत्तर ने नीलम की सोच बदल दी और यह सिखा दिया कि उपहार महँगा नहीं, बल्कि नया और सम्मानजनक होना चाहिए.

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भीड़भाड़ वाली शहर की सड़क पर अकेला बैठा एक उदास व्यक्ति, आसपास लोग मोबाइल में व्यस्त, आधुनिक जीवन की संवेदनहीनता और अकेलेपन का दृश्य

खामोश रिश्ते

यह कविता आधुनिक समाज की उस सच्चाई को उजागर करती है, जहाँ हर व्यक्ति अपनी ही बात कहने में व्यस्त है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं बचा। रिश्तों की निकटता केवल भौतिक रह गई है लोग पास होकर भी दूर हैं, और मन की पीड़ा अनसुनी रह जाती है।

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बिल्कुल तुम्हारी तरह

पति-पत्नी के रिश्ते में तुलना, अपनापन और प्रेम की हल्की नोकझोंक को बयां करती यह भावनात्मक हिंदी लघुकथा बताती है कि हर रिश्ता अपनी अलग पहचान चाहता है।

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मानसून के दौरान महाराष्ट्र के कास पठार पर खिले रंग-बिरंगे जंगली फूल और धुंध से ढकी सह्याद्रि पर्वतमाला का मनमोहक दृश्य.

मानसून में बन जाता है ‘फूलों का स्वर्ग’ महाराष्ट्र

बारिश के मौसम में महाराष्ट्र के ये 7 खूबसूरत पठार हरियाली, रंग-बिरंगे जंगली फूलों, झरनों और धुंध से ढक जाते हैं. अगर आप मानसून ट्रिप की योजना बना रहे हैं, तो इन प्राकृतिक स्वर्ग जैसी जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें.

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