ख़ामोशी के पते

खिड़की के पास बैठा एक अकेला व्यक्ति, हाथ में ख़त लिए, जो इंतज़ार और अधूरे इश्क़ को दर्शाता है “हर ख़त का जवाब नहीं आता… कुछ एहसास बस खामोशी में रह जाते हैं”

शिल्पा सिन्हा, सुप्रसिद्ध लेखिका एवं वीएफएक्स इंजीनियर कोल्हापुर,

कुछ पतों के पते मिला नहीं करते,
कुछ ख़तों के जवाब आया नहीं करते।

मुड़ के देखा बहुत दूर तक हमने,
दम घुटने तक यूँ सताया नहीं करते।

कुछ देर, कुछ दूर तक साथ थे चले,
इश्क़ ऐसे अधूरा निभाया नहीं करते।

छुपाकर रखना आँखों में तूफ़ान सारे,
अपने ग़म ग़ैरों को बताया नहीं करते।

उसी जगह बार-बार जाया नहीं करते,
इंतज़ार में वक़्त यूँ जाया नहीं करते।

कुछ पतों के पते मिला नहीं करते,
कुछ ख़तों के जवाब आया नहीं करते…

7 thoughts on “ख़ामोशी के पते

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    – सुरेश परिहार

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