माँ की तपस्या, बेटी की उड़ान

सिंगल मदर अपनी बेटी को पढ़ाते हुए, संघर्ष और प्यार का भावुक दृश्य एक माँ जिसने अपने सपनों को पीछे छोड़कर बेटी के सपनों को पंख दिए…

डिम्पल ओसवाल, सोशल वर्कर

परवरिश एक बेटी की,
एक माँ ने की अकेले,
बिना किसी कंधे के सहारे,
बिना किसी “कैसे होगा?” पूछने वाले के.

ना कोई छुट्टी, ना कोई विश्राम,
ना थामने वाला हाथ,
ना समझने वाली आँखें,
बस एक बेटी…
और वो माँ,
जिसकी पूरी दुनिया उसी एक चेहरे में सिमट गई.

कभी डॉक्टर बनने का सपना था उसका,
सफेद कोट में खुद को देखा था आईने में,
पर जब जिंदगी ने दोराहे पर ला खड़ा किया,
तो उसने वो सपना तह करके
बेटी की किताबों के नीचे रख दिया.

कभी साड़ी में पल्लू सँभालती,
कभी किराए की दुकान पर झोले टाँगती,
कभी कॉल सेंटर की रातें काटती,
तो कभी सब्ज़ी मंडी में खुद्दारी बेचकर
बेटी की फीस की पर्ची भरती.

बेटी कहती –
“माँ, मैं इंजीनियर बनूँगी.”
माँ हँसती है
“बिल्कुल बनोगी,
मैं खुद को भूल गई तेरे लिए,
तू अपने आपको कभी मत भूलना.”

वो माँ,
जिसने कभी जलेबी अपने लिए नहीं खरीदी,
पर बेटी के लिए सर्दियों में
गाजर का हलवा बनाया.

वो माँ,
जो अपने पुराने चप्पल चुपचाप सीती रही,
पर बेटी को नए स्पोर्ट्स शू दिलाते हुए
ऐसे खुश हुई,
जैसे खुद माउंट एवरेस्ट चढ़ ली हो.

रात के दो बजे बेटी पढ़ती थी,
माँ चुपचाप पास में बैठती थी,
“कुछ समझ ना आए तो मैं हूँ…”
कहकर हिम्मत देती थी,
और उसे समझाने के लिए
खुद किताबें पढ़ना शुरू कर दिया.

माँ का व्रत बेटी की सफलता,
माँ की पूजा – उसका आत्म-समर्पण,
माँ की भक्ति
हर उस आँसू को चूम लेना,
जो बेटी की आँखों में आ भी न पाए.

दुनिया ने कहा —
“सिंगल मदर होना आसान नहीं है.”
माँ ने कहा —
“तो क्या हुआ?
मेरी बेटी का हौसला
दो लोगों से भी ज्यादा मजबूत होगा.”

वो माँ,
जो खुद तकलीफ में थी,
पर बेटी के स्कूल प्रोजेक्ट के लिए
रात भर जागती रही,
स्केच बनाती रही,
फेविकोल से हाथ चिपकते रहे,
पर बेटी की मुस्कान से
हर दर्द मिटता गया.

हर त्योहार अधूरा था,
ना राखी का भाई,
ना दीवाली के दिए जलाने वाला पिता,
पर माँ ने हर कमी को
दोगुनी खुशी में बदल दिया.

आज बेटी इंजीनियर बन रही है,
कैंपस इंटरव्यू से कॉल आया,
बेटी दौड़ते हुए माँ से लिपट गई.

माँ की आँखों से आँसू झरे,
पर इस बार ये आँसू कमजोरी के नहीं,
बल्कि जीत की गवाही थे.

क्योंकि उसने सिर्फ बेटी को बड़ा नहीं किया,
उसने एक युग बदल दिया है.

माँ कोई नाम नहीं,
वो एक भूमिका है,
जो भगवान ने खुद निभाने के लिए
सबसे हिम्मती औरत को चुना है.

हर सिंगल मदर को सलाम,
जो माँ होने के साथ-साथ
पिता भी बनी,
दोस्त भी बनी,
और दुनिया से लड़ी…
सिर्फ अपनी बच्ची के लिए.

3 thoughts on “माँ की तपस्या, बेटी की उड़ान

  1. आपने इस प्लेटफार्म पर जो स्नेह दिखाया है उसके लिए दिल से आभार, लेखकों की रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी अवश्य प्रदान कीजिए और वेेबसाइट के बारे में भी अपनी अमूल्य राय दें ताकि भविष्य में इसमें अच्छे परिवर्तन किए जा सकें. आपके सुझाव हमारे लिए बेशकीमती है. अपनी राय अवश्य प्रकट करें.
    – सुरेश परिहार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *