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बाद तेरे कभी किसी को भी हिंदी ग़ज़ल

बाद तेरे कभी किसी को भी…

बाद तेरे कभी किसी को भी अहमियत दी न ज़िंदगी को भी… प्रेम, विरह और यादों के एहसास से बुनी यह ग़ज़ल रिश्तों की गहराई और मन की खामोशी को शब्द देती है।

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तेरे नाम की मिट्टी में सपनों के बीज बोती प्रेमिका

तेरी ओर

तेरे नाम की मिट्टी में सपनों के बीज बोने और उसकी मौजूदगी को अपनी साँसों में महसूस करने की यह कविता प्रेम के बेहद कोमल और आत्मीय एहसास को शब्द देती है.

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सब्जी के ठेले पर खरीदारी करती अंजलि और बुजुर्ग सब्जी विक्रेता

पेटीएम है…

अंजलि दिल्ली लौटते समय सब्जियाँ खरीदती है. छुट्टे पैसे न होने पर जब वह सामान लौटाने लगती है, सब्जी वाली अम्मा का सहज जवाब ‘पेटीएम है’ कहानी को एक दिलचस्प मोड़ देता है.

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मेहनतकश माँ को काम करते देखते हुए उसका छोटा बेटा

वह आती है

थके कदमों में भी उजास और साँसों में विश्वास लिए आगे बढ़ती एक मेहनतकश माँ. यह कविता उसके श्रम, मातृत्व, संघर्ष और अपने बच्चों के लिए बुने जा रहे बेहतर भविष्य की मार्मिक कहानी कहती है.

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तीज पर्व पर झूले पर बैठी महिला और शिव-पार्वती की पूजा

तीज

तीज केवल श्रृंगार और व्रत का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, तपस्या और समर्पण का प्रतीक है. प्रस्तुत कविता में शिव-पार्वती के माध्यम से तीज के आध्यात्मिक और भावनात्मक पक्ष को अभिव्यक्त किया गया है.

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हिंदी भाषा हमारी पहचान और भारतीय संस्कृति का प्रतीक

हिंदी

हिंदी हमारे लिए केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार, आत्मसम्मान और पहचान का प्रतीक है. दिल से दिल का संवाद और अपनेपन का अनुवाद है हिंदी.

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हिंदी भाषा और हिंदी शिक्षकों की उपेक्षा पर लेख

हिंदी से परहेज क्यों ?

अंग्रेजी सीखना गलत नहीं, लेकिन क्या आधुनिकता की दौड़ में हिंदी से दूरी बनाना सही है? हिंदी शिक्षकों की उपेक्षा, हिंग्लिश के बढ़ते चलन और बदलती शिक्षा व्यवस्था पर एक विचारोत्तेजक लेख.

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सुनहरी किनारी हिंदी कहानी में बच्ची की रानी वाली पोशाक सिलता दर्जी

सुनहरी किनारी

एक छोटी बच्ची की फैंसी ड्रेस ठीक कराने के लिए माँ पुराने दर्जी शेरा भाई के पास पहुँचती है. एक पुरानी पोशाक में लगी सुनहरी किनारी सिर्फ ड्रेस नहीं सँवारती, बल्कि माँ की सोच को भी एक नई दिशा देती है.

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स्थानांतरण पर हिंदी कविता में अनजाने शहर और नए रिश्ते

स्थानांतरण

हर बार एक अनजाने शहर में पहुँचकर लोगों के बीच अपना बन जाना और फिर दूसरे शहर की ओर चल देना. ‘स्थानांतरण’ कविता बदलते शहरों और बनते रिश्तों की भावनात्मक कहानी है.

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