ख़ुशबू माँ के साथ की
यह कविता माँ के साथ बिताए गए उन अनमोल पलों की स्मृतियों को सजीव करती है, जहाँ ममता, त्याग, अनुशासन और प्रेम की खुशबू हर शब्द में महसूस होती है।
मौन का अपराध
आधुनिक समाज में गिरते मूल्यों, बढ़ती विषाक्तता, संवादहीनता और विवेक के संकट पर गहन चिंतन प्रस्तुत करता है। साथ ही यह मूल्य आधारित पुनर्निर्माण और चेतना जागरण का आह्वान भी करता है।
सब कुछ याद है मुझे
विजया डालमिया, हैदराबाद वो हमारा दीवानापन थाया बचपन की मोहब्बत,जिसे दोस्ती का नाम देकरकरते थे हर पल शरारत। बड़े होने पर भीसब कुछ याद है मुझे…. छोटी-छोटी ज़िद, छोटी-छोटी तकरार,देती थी लंबी-सी खुशी।वो तपती धूप मेंएकटक उसके घर की ओर ताकते रहना,उसकी एक झलक पाने के लिए। पैरों में पड़े फफोलों को देखकरउसका मुझे डाँटना,और…
तोहमत लगा दीजिए
“तोहमत लगा दीजिए” प्रेम, शिकायत और अपनत्व की भावनाओं से सजी एक नाज़ुक ग़ज़ल है, जिसमें रिश्तों की मिठास और दिल की गहराइयों को खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
मां, मुझे भी रोने का हक चाहिए था
एक बेटे का अपनी मां के नाम लिखा गया यह भावुक पत्र समाज में बेटों और बेटियों की परवरिश के अंतर, पुरुषों की भावनाओं और बदलते समय की जरूरतों पर गंभीर सवाल उठाता है।
खूब लड़ी मर्दानी, झांसा वाली रानी..
बंगाल की राजनीति पर आधारित यह व्यंग्य सत्ता, हार-जीत, इस्तीफे और राजनीतिक नाटकों की विडंबना को हास्य और तंज के माध्यम से बेहद रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है।
मानवता के महाकवि : गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और मानवता के अमर स्वर थे। उनका साहित्य आज भी विश्व को प्रेम, संवेदना और विश्वबंधुत्व का संदेश देता है।
