रिश्तों की याद
कभी किसी की मुस्कान, उसकी शरारत और छोटी-छोटी ज़िदें यादों में इस तरह बस जाती हैं कि मन बार-बार एक ही सवाल पूछता है—अब उसे मेरी याद नहीं आती क्या?
मुसलसल याद करते जा रहे हो तुम
ख़यालों में बार-बार लौटते प्रेम, ख़ामुश इशारों और बीते माज़ी की यादों को शब्द देती यह ग़ज़ल दिल के अनकहे एहसासों की खूबसूरत अभिव्यक्ति है।
लुका-छुपी वाला प्रेम
समय की कमी हमेशा प्रेम की कमी नहीं होती। जब जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं और साथ बिताने का समय कम हो जाता है, तब विश्वास, संवाद और समझ रिश्ते को मजबूत बनाए रखते हैं।
कहाँ आसान है एक स्त्री का कर्ण हो जाना
एक स्त्री अपने जीवन में कितने कवच-कुंडल धारण करती है? प्रेम, जिम्मेदारियों, सामाजिक मर्यादाओं और अपने अस्तित्व के बीच संघर्ष करती स्त्री के अंतर्द्वंद्व को कर्ण के रूपक में प्रस्तुत करता संवेदनशील लेख.
लखनऊ में महादेवी वर्मा की पुण्य स्मृति में विश्वभूषण सम्मान समारोह संपन्न
लखनऊ के निराला सभागार में महादेवी वर्मा की पुण्य स्मृति में विश्व भूषण सम्मान समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही.
ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं
एक सुनसान और बरसों से बंद घर में लौटे व्यक्ति को खामोश दीवारों, पुरानी तस्वीरों और सीलन के बीच बीते जीवन की अनकही कहानियाँ सुनाई देने लगती हैं।
जंगल की आग
पलाश के दहकते फूलों से लेकर पहाड़ों पर खिलते बुरांश तक, ‘जंगल की आग’ बसंत की रंगीन और उन्मुक्त प्रकृति को आग, यौवन और अनुभूति के रूपकों में अभिव्यक्त करती है।
डॉ. रानी गुप्ता को ‘महादेवी वर्मा विश्व भूषण सम्मान-2026’
अहमदाबाद की कवयित्री डॉ. रानी गुप्ता को महादेवी वर्मा के जन्मदिन पर लखनऊ में आयोजित साहित्य महोत्सव में ‘महादेवी वर्मा विश्व भूषण सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया.
