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जब उम्र अपने रंग दिखाती है

चालीस और पचास के बीच की उम्र न तो पूरी तरह जवान रहने देती है और न ही वृद्ध होने की अनुमति। सफेद बाल, मेकअप पर आत्म-हास्य, हील सैंडल में असुविधा और फिल्मों में रुचि की कमी—ये सब संकेत हैं उस उम्र की जटिलताओं और बदलाव की। यह मध्यम आयु में आत्मनिरीक्षण, अनुभव और जीवन की बदलती धाराओं का एक मार्मिक अनुभव है।

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अधूरी ख्वाहिश..

गर्मी के एक दोपहर में, सुदीप बनर्जी के अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही है। निधि, जो अपने पति अमितेश के उपेक्षात्मक और हिंसक व्यवहार से वर्षों से जूझ रही है, यह घोषणा करती है कि मुखाग्नि सुदीप का बेटा सुजीत देगा—एक सच्चाई जिसे अब तक कोई नहीं जानता था। विरोध और संदेह के बावजूद, निधि यह साबित करने पर अडिग रहती है कि सुजीत सुदीप का खून है।

सुदीप के गुजरने के बाद, निधि को उसकी एक रिकॉर्डेड ऑडियो क्लिप मिलती है, जिसमें वह अपनी आखिरी ख्वाहिश व्यक्त करता है—कि निधि उसकी मृत्यु के बाद भी उसके नाम का सिंदूर लगाए और उसकी पत्नी की तरह जीवन बिताए। निधि इस इच्छा को उसी रात पूरी करती है।
कुछ दिन बाद, वकील की उपस्थिति में सुदीप की वसीयत पढ़ी जाती है, जिसमें उसकी सारी संपत्ति निधि और उसके बाद सुजीत के नाम की जाती है, और निधि से कहा जाता है कि वह उसकी विधवा नहीं बल्कि सुहागन की तरह इस घर में रहे। यह सब सुनकर सुदीप की माँ निधि को अपनाती है और अपने पोते को गले लगाती है। यह क्षण एक रिश्ते के खोने के दर्द के साथ-साथ नए अपनत्व और स्वीकृति के सुख को भी दर्शाता है।

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Snowfall wedding at Triyuginarayan Temple Rudraprayag Uttarakhand

बर्फ में फेरे, अग्नि में संकल्प

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित त्रियुगी नारायण मंदिर में मेरठ के एक दंपति ने बसंत पंचमी के अवसर पर भारी बर्फबारी के बीच विवाह कर एक अनोखी मिसाल पेश की. शिव और पार्वती के विवाह स्थल माने जाने वाले इस पवित्र मंदिर में हुआ यह विवाह अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

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नदी किनारे संध्या में बैठा एक चिंतनशील लेखक, प्रकृति को निहारते हुए, सृजन और शब्दों के मौन पर विचार करता हुआ।

शब्दों का मौन

जब शब्द जन्म लेना बंद कर देते हैं, तब लेखक सबसे अधिक बेचैन होता है। यह कविता उसी सृजनात्मक मौन, भीतर की उदासी और प्रकृति से संवाद के माध्यम से लेखन की रहस्यमयी पीड़ा को गहराई से व्यक्त करती है।

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समाज में फिल्म माध्यम का महत्व सर्वाधिक

समाज के अंतिम छोर तक किसी भी विषय को पहुंचाने का कार्य फिल्म माध्यम के जरिए प्रभावी ढंग से होता है, इसलिए इस माध्यम का महत्व सर्वाधिक है, ऐसा मत प्रसिद्ध अभिनेत्री रेणुका दफ्तरदार ने व्यक्त किया. पी. एम. शाह फाउंडेशन और वर्धमान प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित 14वें स्वास्थ्य फिल्म महोत्सव का समापन रेणुका दफ्तरदार की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुआ

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ठंडी शाम में चाय के साथ पुरानी यादों में खोई महिला, मोबाइल स्क्रीन पर दोस्त से बातचीत

कुछ अनकहे रिश्ते…

कुछ अनकहे रिश्ते” एक मार्मिक कहानी है जो दोस्ती, ममता और विश्वास के उस पवित्र बंधन को दर्शाती है, जिसे नाम की आवश्यकता नहीं होती। यह रचना भावनाओं की गहराई और रिश्तों की सच्चाई को स्पर्श करती है।

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कॉलेज की भीड़ में अकेला और मानसिक तनाव से जूझता एक युवा छात्र।

भीड़ में अकेला

“भीड़ में अकेला” एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जो युवाओं के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष, सामाजिक दबाव और संवाद की कमी को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। यह कहानी बताती है कि समय पर समझ, प्रेम और संवाद किसी की जिंदगी बदल सकते हैं।

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इंतज़ार में डूबी प्रेमिका, जो अपने प्रिय की याद में खिड़की के पास बैठी है

तुम दूर हो या क़रीब ?

जब संवाद थम जाता है और इंतज़ार लंबा हो जाता है, तब प्रेम अपने भीतर सवालों की शक्ल लेने लगता है। यह रचना उसी असमंजस को स्वर देती है, जहाँ नज़दीकियाँ इतनी गहरी रही हैं कि दूरी का अर्थ समझ में ही नहीं आता। प्रेम में किया गया भरोसा, व्यस्तताओं के बीच पनपती बेचैनी और यह डर कि कहीं अपना व्यक्ति धीरे-धीरे दूर तो नहीं हो रहा इन्हीं भावों के बीच यह कविता पाठक को रिश्तों की सबसे कोमल और सच्ची अनुभूति से जोड़ती है।

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बारिश की बूंदें: धरती और आकाश के प्रेम का अद्भुत काव्य

बारिश की बूंदें

बारिश की पहली बूंद जब सूखी धरती को छूती है, तो वह केवल मिट्टी को नहीं, बल्कि भावनाओं को भी जीवन देती है। यह कविता धरती और आकाश के उस अनंत प्रेम की कहानी है, जहाँ हर बूंद एक प्रेम-पत्र बनकर उतरती है और हर स्पर्श विरह को मिलन में बदल देता है। प्रकृति के मनोहारी रूपकों के माध्यम से प्रेम, वात्सल्य, प्रतीक्षा और आत्मिक एकाकार होने की अनुभूति को बेहद भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है।

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नियति से बहस नहीं

शैफाली सिन्हा, नवी मुंबई (महाराष्ट्र) बचपन से ही मैंनेख़ुद को पीछे रखकरसबकी सेवा की।लोग आश्वासन देते रहेइसका फल ज़रूर मिलेगा। फल की कभी चाह नहीं रही,बस कोई स्नेह सेदो मीठे बोल कह देतो वही मेरी सबसे बड़ी पूँजी बन जाते। शायद यही मेरी नियति थी,या शायद मेरा होना हीकिसी और का सहारा बनने के लिए…

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