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डॉ. अनामिका दूबे ‘निधि’ : शब्दों से जीवन संवारने वाली

साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि संवेदनाओं, संघर्षों और समाज को नई दिशा देने का माध्यम है। शिक्षिका, साहित्यकार और राष्ट्रीय साहित्य नवरत्न मंच की संस्थापिका डॉ. अनामिका दूबे ‘निधि’ ने अपनी लेखनी को केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं बनाया, बल्कि इसे नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का मिशन बनाया है। इस विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा, चुनौतियों, पुरस्कारों, डिजिटल युग में साहित्य की बदलती तस्वीर और युवा रचनाकारों के लिए अपने प्रेरक संदेश को बेहद आत्मीयता के साथ साझा किया है।”

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महानता और इंसानियत के बीच खड़ी एक चिंतनशील महिला, जो जीवन के संघर्ष और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

वह बहक गई थी…

क्या केवल अच्छा इंसान होना ही महानता की पहली शर्त है? यह कविता आधुनिक युग में महानता, संवेदनशीलता, अतिवाद और मानसिक संघर्ष के जटिल संबंधों पर गहन प्रश्न उठाती है।

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सच्चा साथी, सच्चा प्रेम

यह भावपूर्ण हिंदी कविता प्रेम, स्नेह और जीवनसाथी के साथ जुड़े भावनात्मक अनुभव को उजागर करती है। इसमें प्यार की गहराई, भरोसा और साथी के साथ जीवन भर निभाए गए रिश्ते की मिठास को सरल और असरदार भाषा में व्यक्त किया गया है।

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कुछ रंग ऐसे भी… | रिश्तों, धोखे और ख़ामोशी पर विचारशील कविता

कुछ रंग ऐसे भी…

यह कविता जीवन के उस कैनवास की कथा है, जहाँ धोखे और बनावटी रंग इतने फैल जाते हैं कि प्रेम, अपनेपन और आत्मा के रंग खो से जाते हैं, और बचती है केवल ख़ामोश उदासी।

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दूर होकर भी दिल के पास

प्यार में मर्यादा

प्यार सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि किसी की ख़ामोशी को समझ लेने का नाम है। सोशल मीडिया के इस दौर में रिश्ते जल्दी बन जाते हैं, लेकिन उन्हें खूबसूरत बनाए रखने के लिए प्रेम के साथ मर्यादा, सम्मान और संवेदनशीलता भी ज़रूरी है।

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नारी

नारी केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि जीवन का उद्घोष है। नारी कई रूपों में विघटित है, गणना से परे, क्योंकि इसके रूप तो अगणित हैं। आज नारी अबला नहीं, बल्कि सबला बनकर अपने अधिकार और सम्मान के परचम लहरा रही है।

पुरुष प्रधान जगत में नारी अब पुरुष से कम नहीं है। नारी पृथ्वी की शक्ति है; बिना नारी के जगत शक्ति विहीन है। संपूर्ण सृष्टि में नारी के बिना सब कुछ ही अधूरा और स्तरहीन है। नारी केवल कामिनी नहीं, शस्त्र-शास्त्र की पर्याय है। नारी केवल जन्मदाता नहीं, बल्कि कभी-कभी मृत्यु भी बन जाती है।

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जंगल में झरने के पास बैठे एक युवक और चट्टान पर खड़ी पहाड़ी महिला, दोनों के चेहरों पर गहरा दर्द और भावनात्मक जुड़ाव

पीर की नदी

बहुत देर तक जंगल में भटके कृष की थकान झरने की कल-कल में घुलने लगी। तभी चट्टान पर झुकी एक पहाड़ी औरत दिखी। उसकी आँखों की पीड़ा कृष को अपनी लग रही थी। वे दोनों अलग भाषाएँ बोलते थे, पर दर्द की भाषा एक थी। इशारों और टूटे शब्दों के बीच दोनों अपनी-अपनी चुप चीखें उँडेलते रहे। वह भार, जो दिलों पर चट्टान बना बैठा था, धीरे-धीरे पिघलता चला गया। उस पल उन्हें समझ आया कि पीर को भाषा नहीं चाहिए .वह तो गूंगी होती है, पर हर अंग से बोलती रहती है।

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राजस्थान में मौसम बदला, अलवर-सीकर में कोहरा

राजस्थान में मौसम ने फिर करवट ली है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस खत्म होने के साथ ही उत्तर-पश्चिमी हवाओं का असर शुरू हो गया है। मंगलवार की रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण ठंड और तेज हो गई। सीकर में मंगलवार को रिकॉर्ड 2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

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महिदपुर रोड में चातुर्मास के दौरान सिद्धि तप करते 52 जैन तपस्वी

52 तपस्वियों की साधना से महिदपुर रोड में गूंजा तप का संदेश: धर्म और तपस्या का बना विशेष वातावरण

महिदपुर रोड में चातुर्मास के दौरान 52 तपस्वी सिद्धि तप की आराधना कर रहे हैं। जानिए सिद्धि तप क्या है, इसकी प्रक्रिया और जैन धर्म में इसके आध्यात्मिक महत्व को।

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टूटते ख्वाबों की ग़ज़ल

गहन भावनाओं और रात के सन्नाटे के माध्यम से जीवन की नाजुकताओं और बेचैनियों को बयान करती है। लेखक की नींद में खलल डालने वाली घटनाओं के माध्यम से यह व्यक्त किया गया है कि किस तरह अचानक आने वाली परिस्थितियाँ हमारी मानसिक शांति और हौसलों पर असर डालती हैं। रात भर दिल और चाँद दोनों रोते हैं, जो मानवीय संवेदनाओं का मिश्रण प्रस्तुत करता है। “इत्र सी सुगंध” और “तितलियों के पंखों पर रंग” जैसी छवियाँ जीवन की सुंदरता और नाजुकता को दर्शाती हैं, 

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