Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

हे केशव, तेरी यह कैसी माया?

कभी साधारण जप सा लगता कृष्ण-नाम आज अचानक मन में तरंग बनकर उठा। जैसे ही भाव की एक बूंद हृदय में गिरी, भीतर का सारा सूखापन हर गया। लगा मानो केशव स्वयं दया कर उपस्थित हो गए हों। बरसों की पुकार, प्रतीक्षा और तड़प का उत्तर आज मिला। रोम-रोम भक्ति से भीग उठा यही क्षण जन्म का सार्थक होना है।

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विभाजित समाज और इंसानियत के संकट को दर्शाता भावनात्मक प्रतीकात्मक दृश्य।

इन्सानियत

‘इन्सानियत’ एक सामाजिक चेतना से भरपूर कविता है, जो अफवाहों, धर्म और समाज में बढ़ती संवेदनहीनता के बीच मानवता के संकट को तीखे और मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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प्रेम का संगम

यह कविता गहरे प्रेम और स्मृतियों की शक्ति को दर्शाती है। कवयित्री अपने प्रिय के अस्तित्व को अपनी स्मृतियों और प्रार्थनाओं में जीवित रखती है। उसका प्रेम इतना निष्ठावान है कि उसने किसी उद्देश्य या लक्ष्य की अपेक्षा नहीं की, केवल यह सुनिश्चित किया कि वह अपने प्रिय की खुशी और अस्तित्व का सम्मान करती रहे। कवयित्री अपने प्रेम को एक फल या कर्म के रूप में समर्पित करती है और इसे ईश्वर के माध्यम से पवित्र बनाती है।

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devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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अधूरे प्रेम और आत्मसम्मान की हिंदी कहानी की भावुक युवती

साथ हो तुम मेरे: जब अधूरा प्रेम ही जिंदगी का सहारा बन गया

विजया डालमिया, हैदराबाद ‘साथ हो तुम मेरे’ कनिका की कहानी है, जिसे प्रेम मिला तो सही, लेकिन स्वीकार नहीं मिला। सांवले रंग को लेकर मिले अस्वीकार ने उसे भीतर तक तोड़ दिया, मगर उसने अपने प्रेम को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कपिल उसके जीवन में साथ होकर भी साथ नहीं था, फिर भी उसकी…

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अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते श्रद्धालु और स्वच्छता अभियान के तहत लगाए गए डस्टबिन

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी का स्वच्छ संदेश

अमरनाथ यात्रा 2026 देश की पहली जीरो लैंडफिल धार्मिक यात्रा बनने जा रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, बायोगैस निर्माण और प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था की व्यापक तैयारी की है।

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टेबल पर खुली किताब, बिखरे कागज़ और खिड़की से आती रोशनी, अधूरे सपनों का भावनात्मक दृश्य

ख़्वाब

ख़्वाब” कविता अधूरे सपनों, बिखरी ख्वाहिशों और यादों की गहराई को व्यक्त करती है। यह रचना बताती है कि हर सपना पूरा होना ज़रूरी नहीं, कुछ अधूरे ख़्वाब ही जीने की वजह बन जाते हैं और यादों में हमेशा जिंदा रहते हैं।

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मैदान से महाकाल तक…

गरिमामय एवं आत्मीय समारोह में 4 दशक से मैदानी पत्रकारिता के पर्याय बने वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की प्रथम कृति ‘किस्से कलमगिरी के’ का लोकार्पण जाल सभागृह में आयोजित हुआ। समारोह के अतिथि जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजय शंकर मेहता, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता महा विद्यालय भोपाल के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी थे। अध्यक्षता राष्ट्र कवि संचालक सत्यनारायण सत्तन ने की। 

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मेरा घर कौन-सा…?

यह कविता एक स्त्री की आत्मसंवेदना और उसके भीतर के संघर्ष का मार्मिक चित्रण करती है। वह बताती है कि कैसे समाज और परिवार की परंपराओं के बीच जीते-जीते वह स्वयं अपने ही घर में पराई बन जाती है। मन की पीड़ा इतनी गहरी है कि वह धीरे-धीरे उस “गैरपन” की स्थिति की अभ्यस्त हो जाती है — जैसे किसी ने अपनी पहचान को कुहासे में ब्याह दिया हो।
कविता में “एक धुंध से निकलकर दूसरी धुंध में” जाना, जीवन की निरंतर उलझनों और अस्पष्टताओं का प्रतीक है। वर्जनाओं से घिरी हुई स्त्री फिर भी अपनी “कामनाओं” को निर्बाध बहने देती है, क्योंकि वही उसकी जीवंतता का प्रमाण हैं। अंत में “मेरा घर कौन-सा…?” यह प्रश्न केवल भौतिक घर का नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और आत्मीयता की खोज का प्रतीक बन जाता है। यह कविता स्त्री-मन की उस पीड़ा को उजागर करती है, जो प्रेम, संबंध और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच अपनी पहचान तलाशने का प्रयास कर रही है।

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