
अचिन गुप्ता, उम्र-11 वर्ष, अहमदाबाद (गुजरात)
वृंदावन है, मथुरा है, चाहे काशी है,
हर जगह चिड़िया प्यासी है।
जीवदया का गुणगान करने वालों, दिखाओ
कितनी बार बर्तन रखा पंछी के लिए, बताओ।
चिड़िया को जलदान देना हर विद्यामंदिर में सिखाओ,
अब हर चिड़िया की प्यास मिटाओ,
क्योंकि चिड़िया प्यासी है।
दादी-नानी बतलाती हैं रंग-बिरंगी चिड़िया थी,
मम्मी-पापा कहते हैं कि कुछ रंगों की चिड़िया थी।
हमने तो देखे बस कौवे और कबूतर हैं,
क्या आने वाले कल में हर विहग निर्वासी है?
क्योंकि चिड़िया प्यासी है!
पानी पिलाना बहुत बड़ा काम है,
जल-सेवा ही चार धाम है।
क्या नहीं प्रकृति से हमें इतना भी प्यार है
कि चिड़िया के लिए रख सकें हम जल दो बार?
क्योंकि चिड़िया प्यासी है!

Very nice Achin… keep going
बहुत अच्छा, ऐसे ही लिखते रहो