Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
sleep with blanket in summer

गर्मी में भी बिना चादर क्यों नहीं आती नींद?

गर्मी में भी कई लोगों को बिना चादर ओढ़े नींद नहीं आती। इसके पीछे मनोवैज्ञानिक सुकून, स्लीप सिग्नल और शरीर के तापमान को संतुलित रखने जैसे वैज्ञानिक कारण जुड़े होते हैं, जो बेहतर नींद में मदद करते हैं।

Read More

उज्जैन से संत हिरदाराम नगर के बीच श्रावण मास में विशेष ट्रेन 26 से

श्रावण मास में उज्जैन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने उज्जैन और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के बीच 26 जुलाई से 31 अगस्त तक रोज चलने वाली विशेष अनारक्षित ट्रेन की सुविधा शुरू की है। यह ट्रेन विशेष किराए पर चलेगी और महाकाल दर्शन को आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी साबित होगी।

Read More

कृष्ण और कृष्ण प्रिया

वह स्वयं को हर रूप में देखता है वामन, नरसिंह, माधव, नंदलाल एक ही सत्ता, अनेक लीलाएँ। और उसके सामने खड़ी है ‘कृष्ण प्रिया’, जिसकी पहचान केवल उसकी भक्ति है। ग्वालिन के वेश में, आँखों में प्रेम और अधरों पर पुकार लिए, वह बस इतना चाहती है कि कृष्ण नाम में खो जाए। उसके लिए वही तिलक है, वही श्रृंगार, वही जीवन। अंत में उसकी एक ही विनती रह जाती है. “जब मैं कहूँ… आओ न स्वामी, तो तुम आ जाना।”

Read More

मकाँ

एक जर्जर मकाँ खंडहर की तरह ढहता दिखाई देता है। कभी उसी छत के नीचे बच्चों की चहचहाहट गूँजती थी, माँ और बाबा की बातें घर को जीवंत बना देती थीं। आज वातावरण उदासी और रंजो-ग़म से भरा है, मानो साँसें भी उखड़-सी गई हों। दिल बार-बार उसी पुराने आशियाने को ढूँढता है, जहाँ अपनापन और जीवन की गर्माहट हुआ करती थी।

Read More
कारगिल विजय दिवस पर माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच की राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी

कारगिल विजय दिवस पर ‘माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत’ की राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को

कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत द्वारा 27 जुलाई को राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में देशभर के 200 से अधिक वरिष्ठ एवं नवोदित साहित्यकार अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। आयोजन में प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं अतिथि भी सहभागिता करेंगे। मंच का उद्देश्य साहित्यिक प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान कर साहित्य और राष्ट्रभावना को सशक्त बनाना है।

Read More
मिट्टी के घर और जीवन की नश्वरता पर आधारित हिंदी कविता

मिट्टी का ये घर है अपना

मिट्टी से बने इस शरीर और संसार की नश्वरता को समझाती यह कविता याद दिलाती है कि धन, मान-सम्मान और रिश्ते सब यहीं रह जाते हैं. जीवन में जब तक साँसें हैं, प्रेम बाँटना ही सबसे बड़ी सार्थकता है।

Read More
पुणे में जमीन निवेश के नाम पर 2.40 करोड़ की ठगी, रिटायर्ड एसीपी समेत 5 पर केस

जमीन निवेश के नाम पर 2.40 करोड़ की ठगी

पुणे में जमीन निवेश के नाम पर 2.40 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें रिटायर्ड एसीपी सहित 5 लोगों पर केस दर्ज किया गया है. आरोपियों ने मुनाफे का झांसा देकर पैसे लिए और शिकायतकर्ता को धमकाया.

Read More

ज़िंदगी गुनगुनाने लगी

अब ज़िंदगी मानो गुनगुनाने लगी है। हवा की धीमी-धीमी बयार की तरह इसमें मिठास घुलने लगी है। मीठे सपनों की छाँव में रात भी अलसाई-सी करवट लेती है। मन अजीबोगरीब खयाल बुनता रहता है और उजली चांदनी-सी उम्मीद सँजोए रहता है।

बातों और मुलाक़ातों का सिलसिला लगातार चलता है, फिर भी दिल के भीतर कहीं एक हल्की-सी खलिश बनी रहती है। बीते दिनों में चारों ओर दावानल था, घाव भी हरे-भरे थे। ऐसे कठिन समय में उसकी बातें मोगरे की महक जैसी सुकून देती थीं।

Read More

नेत्रदान और देहदान कर अमर हो गईं सुशीला दिवेकर

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बचाय अपने चिकित्सकीय प्रोफेशन को सर्वोपरि मानते हुए चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि दिवेकर ने अपनी माता सुशीला दिवेकर की पार्थिव देह दान कर दी। इससे पहले 77 वर्षीय दिवेकर के नेत्रदान भी कराए गए। प्रशासन और पुलिस ने ऐसी देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन और वरिष्ठ चिकित्सकों ने इसे अनुकरणीय इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाली घटना बताया।

Read More

बरसात में…

बरसात को जीवन, प्रकृति और मानवीय अनुभवों का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया गया है। बारिश की बूंदें पत्तों और फूलों पर मोती की तरह टपकती हैं, बिजली के तारों पर झिलमिलाती हैं और धरती में अमृत जैसी बूंदों के रूप में समा जाती हैं। वहीं, जर्जर मकान ढहते हैं और लोग अपने घरों और यादों को बचाने के लिए प्रयास करते हैं। शहर और गाँव की सड़कों पर बच्चे बारिश में खेलते हैं, नदियाँ अपने भीषण बहाव में सब कुछ बहा लेती हैं, और जानवर तथा पक्षी अपनी परिस्थितियों से जूझते हैं। इसके बीच, बरसात जीवन में रिश्तों, साहस और मानवीय संवेदनाओं को पुनर्जीवित करती है। कविता यह दर्शाती है कि बरसात का सौंदर्य और जीवन में उसकी भूमिका पहले जैसी रह गई है, लेकिन अब वह पहले जैसी रूमानी नहीं लगती।

Read More