: मुंबई मंडल के 6 रेलवे स्टेशनों पर ‘स्टेशन महोत्सव’
भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से मध्य रेल ने ‘स्टेशन महोत्सव’ के तहत मुंबई मंडल के 6 हेरिटेज स्टेशनों पर शताब्दी समारोह का आयोजन किया। रेलवे बोर्ड की सलाह पर आयोजित इस विशेष समारोह ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), रे रोड, आसनगांव, वासिंद, कसारा और इगतपुरी स्टेशनों को इतिहास, संस्कृति, तकनीक और उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया।

इस आयोजन का केंद्रबिंदु रहा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, जहां जीआईपीआर (ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे) युग से संबंधित अनेक कलाकृतियों की एक भव्य हेरिटेज प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में पीतल की घंटियाँ, पुराने लैंप पोस्ट, रेलवे कर्मचारियों के बैज, लकड़ी की हेरिटेज कुर्सियाँ, पेंडुलम घड़ियाँ, कोट-छाता स्टैंड, बॉल और टोकन मशीन, नकदी आय के लोहे के बक्से जैसे ऐतिहासिक सामान प्रदर्शित किए गए। जीआईपीआर युग के स्टीम लोकोमोटिव और लकड़ी के डिब्बों के मॉडल, रंगीन रोशनी से सुसज्जित सीएसएमटी हेरिटेज भवन की लघु प्रतिकृति, और रेलवे की आधुनिकता को दर्शाते वंदे भारत ट्रेन व बुलेट ट्रेन के मॉडल ने दर्शकों को अतीत और भविष्य की अनोखी यात्रा करवाई।
इस भव्य प्रदर्शनी में रेलवे की प्रगति को दर्शाते चार्ट, पुराने और नवीन फोटोग्राफ, और सूचनात्मक सामग्री ने इतिहास के साथ-साथ विकास की कहानी भी बयां की। प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण रहा VR ऑकुलस ग्लास के माध्यम से सीएसएमटी का 360 डिग्री वर्चुअल टूर, जिसने दर्शकों को विरासत के अंदर झांकने का अनूठा अनुभव प्रदान किया। स्मृतियों को जीवित रखने हेतु सीएसएमटी की रंगीन व श्वेत-श्याम तस्वीरों से सजी डायरी, टी-शर्ट, कॉफी मग और चाबी के छल्ले जैसी स्मारिकाएं भी बिक्री के लिए उपलब्ध रहीं।

उत्सव का उत्साह यहीं नहीं रुका। सीएसएमटी उपनगरीय सभागार में इस थीम पर एक विशाल रंगोली बनाई गई, जिसने समारोह को एक भव्य सांस्कृतिक स्वरूप दिया। सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक चली इस प्रदर्शनी को छात्रों, यात्रियों, रेल प्रेमियों और आम नागरिकों से जबरदस्त उत्साह मिला। शुरुआत के घंटों में ही सैकड़ों आगंतुकों की उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया।
अन्य स्टेशनों – रे रोड, आसनगांव, वासिंद, कसारा और इगतपुरी – पर भी स्टेशन महोत्सव की धूम रही। सजावट, श्रमदान, पौधारोपण और विशेष सेल्फी पॉइंट्स ने यात्रियों को इस उत्सव से जोड़े रखा और स्टेशनों को एक सामाजिक मेलजोल का केंद्र बना दिया।
स्टेशन महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की समृद्ध विरासत को सहेजने और आम नागरिकों के साथ साझा करने की एक प्रभावशाली पहल थी। यह समारोह भारतीय रेलवे के गौरवशाली अतीत, वर्तमान की प्रगति और भविष्य की योजनाओं का संगम बनकर सामने आया। विरासत, आधुनिकता और जनसंवाद का यह उत्सव न केवल स्मृतियों को ताज़ा करने वाला रहा, बल्कि यह रेलवे और समाज के रिश्ते को और भी गहरा कर गया।

सुरेश परिहार वरिष्ठ पत्रकार, पुणे
