Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

राखी के धागों में उलझा बाज़ार और बदलते रिश्तों का रंग

स्नेह के धागों से सिक्त भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम का उत्सव है रक्षाबंधन। पर जिस तरह हर त्योहार बाज़ारवाद की भेंट चढ़ता जा रहा है, वहीं रक्षाबंधन का यह पावन पर्व भी इससे अछूता नहीं रह गया। शायद यही कारण है कि आज त्योहार मनाने से पहले हर किसी को अपनी जेब टटोलनी पड़ती है। आखिर, बाज़ार की चमक-दमक और महंगे से महंगे तोहफ़े खरीदने की होड़ ने आम आदमी के हृदय में उपजने वाली उत्सव की सहज भावनाओं को कहीं न कहीं दबा दिया है।

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“तुम्हारे खतों का पुलिंदा”

तुम्हारे खतों का वह पुलिंदा, जिसे मैंने संदूक में संभाल रखा था, मेरे लिए समय की किताब बन गया है। हर खत अपनी कहानी कहता है कभी देर से उठने की डांट और चाय के ठंडे निशान याद दिलाते हैं, तो कभी तुम्हारी छुटकी की मुस्कान और टीचर की डांट में बचपन की मासूमियत झलकती है। कुछ खत चोट के निशानों, पहली तकरार की मिठास या पहला चुंबन याद दिलाते हैं।

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कपिल दा जवाब नहीं

देश को पहला क्रिकेट विश्व कप दिलाने वाले महान ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान कपिल देव का उज्जैन दौरा पूरी तरह सादगी और अपनत्व से भरा रहा. मंगलवार को अल्प प्रवास पर उज्जैन पहुंचे कपिल देव ने किसी औपचारिक कार्यक्रम या प्रोटोकॉल से दूरी रखते हुए आम लोगों और बच्चों के बीच समय बिताया.

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नारी के सम्मान से ही देवी पूजा सार्थक

नवरात्रि और दुर्गा पूजा केवल देवी की मूर्तियों की आराधना तक सीमित नहीं हैं। यदि समाज में नारी असुरक्षित है, तो देवी पूजन का वास्तविक भाव अधूरा रह जाता है। नारी सिर्फ पूजा का विषय नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की अधिकारी है। उसे सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता मिलती है, तभी देवी की शक्ति, ज्ञान और ममता का प्रतीक सजीव होता है। भारतीय परंपरा में नारी को ‘शक्ति’ कहा गया है, और वही शक्ति घर और समाज की आधारशिला है। मंदिर में दीप जलाना आसान है, पर हर घर, गली और कार्यस्थल पर नारी को सुरक्षित और स्वतंत्र बनाना ही सच्ची भक्ति है। नवरात्रि हमें यही प्रेरणा देती है कि नारी को देवी मानने का अर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि उसके जीवन को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाना है।

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स्त्री

स्त्री, हर ताले की चाबी अपने पास रखती है। घर के हर कोने में, हर रिश्ते में, वह सबकी ज़रूरतों और सपनों के ताले बड़ी आसानी से खोल लेती है। लेकिन विडंबना यह है कि उसके पास कभी अपनी ही मनमर्ज़ी की चाबी नहीं होती। दूसरों के लिए खुली हुई दुनिया के बीच, उसके अपने इच्छाओं का द्वार अकसर बंद रह जाता है।

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इंसानों से पहले कैसे भांप लेते हैं तूफान और बारिश

जब आसमान साफ हो और अचानक पक्षी नीचे उड़ने लगें, मेंढक शोर मचाने लगें या पालतू जानवर बेचैन हो जाएं, तो बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं, “आज बारिश होने वाली है.” सवाल यह है कि क्या जानवर सच में मौसम की आहट पहले सुन लेते हैं. विज्ञान कहता है, हां, लेकिन एक अलग तरीके से.

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निर्लज्ज…

हर सुबह रिनी को वही काले-कलूटे अधेड़ की घूरती नज़रें तड़पा देती थीं। आज गुस्सा चरम पर था. बस पहुँचकर उसने राहत की साँस ही ली थी कि ड्राइवर बोला, “रघु भैया कह गए हैं, आप सीढ़ियाँ चढ़ जाएँ तभी बस स्टार्ट करना… अकेली रहती हैं, सुरक्षित नहीं है न।”सुनकर रिनी ठिठक गई“तो इसलिए वो मुझे घूरता था…”
ड्राइवर की अगली बात ने जैसे उसके भीतर कुछ तोड़ दियारघु अपनी बेटी की दर्दनाक मौत के बाद हर लड़की पर निगरानी रखता था।
पश्चाताप से भरी रिनी ने सीढ़ियाँ चढ़ते हुए पलटकर देखा बस धीरे से घरघराती हुई आगे बढ़ चुकी थी।

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इंजीनियर भावना और मैनेजर यश का सम्मान

सांताक्रूज़ पश्चिम में आयोजित कार्यक्रम में ऑल इंडिया यादव महासभा, मुंबई ने सामाजिक कार्यों में सक्रिय इंजि. भावना और प्रबंधक यश का सम्मान किया। समारोह में चंद्रवीर बंशीधर यादव, गिरधारीलाल पंडित, डॉ. अमर बहादुर पटेल और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम समाज में सकारात्मक योगदान देने वालों को प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।

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पितृपक्ष

पितृपक्ष का यह सोलह दिवसों का पर्व पूर्वजों की स्मृति और श्रद्धा का विशेष समय है। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। वेद, उपनिषद और गीता में भी यही बताया गया है कि आत्मा अजर-अमर है और श्राद्ध से हमें पुण्य मिलता है। कौए और गौ सेवा का विधान पितृपक्ष को और भी पावन बना देता है।

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