Live Wire News लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित, 3 को प्रथम पुरस्कार

मौसमी चंद्रा, रेनू शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने जीता प्रथम पुरस्कार

लाइव वॉयर न्यूज लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। मौसमी चंद्रा,रेनू
शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने प्रथम पुरस्कार हासिल किया, जबकि अन्य रचनाकारों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

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A lone figure standing at the edge of a quiet riverbank during early dawn, soft golden-blue light reflecting on the water. The person looks contemplative, gazing at gentle ripples as if questioning life’s truths. Surrounding nature appears symbolic—distant mountains, drifting

जीवन-मंथन

जीवन की हर बढ़ती घड़ी में मन बार-बार सवाल करता है सुख और दुख के इस लंबे सफ़र में हमने कितना देखा, क्या खोया और क्या पाया। माया अपनी चकाचौंध से हमें छलती रहती है, सत्ता और वैभव के प्रलोभन दिखाती है, और इन्हें पाने की चाह में हम अनगिनत अंधेरों से गुजरते हैं।

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कालू कुत्ते की कहानी

  कालू का दर्द  

कालू नाम के कुत्ते की यह मार्मिक कहानी समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। एक हवेली के बाहर रहने वाला कालू जब एक मासूम बच्ची के साथ हुई निर्दयता देखता है, तो उसका मन व्यथित हो उठता है। उसकी मां मिल्की के शब्द इंसानों की दुनिया की कठोर सच्चाई को सामने लाते हैं जहां बच्चे भी भेदभाव का शिकार होते हैं। यह कहानी संवेदनाओं को झकझोरने वाली एक गहरी सामाजिक टिप्पणी है।

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मैं जब पेड़ लगाता हूँ

प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की सुंदर अभिव्यक्ति है। इसमें कवि ने पेड़ लगाने के आनंद और उससे जुड़ी संवेदनाओं को सहज बालसुलभ भाव में प्रस्तुत किया है। कविता यह संदेश देती है कि पेड़ केवल फल या छाया ही नहीं देते, बल्कि वे मनुष्य और जीव-जंतुओं — सबके जीवन का आधार हैं। दादी के स्नेहिल शब्दों से लेकर झूले पर झूलने की कल्पना तक, हर पंक्ति में प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध झलकता है। यह रचना बच्चों में पेड़ों के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाने वाली है।

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आराधना – जो हर बार टूटी, फिर भी हर बार लौटी

शराब सिर्फ नशा नहीं, एक ज़हर है – जो रिश्तों को अंदर से खोखला कर देता है। आराधना की कहानी किसी फिल्म से नहीं, हमारे ही समाज से निकली सच्चाई है – जहां एक पत्नी अपने शराबी पति की मार, अपमान और बेवफाई को सालों झेलती रही, सिर्फ इसलिए कि शायद अगली बार सब ठीक हो जाएगा। लेकिन कभी नहीं हुआ। फिर भी वह लौटी… क्योंकि औरतें सिर्फ माफ नहीं करतीं, वो हर बार खुद को जोड़ती हैं – खामोशी से, टूटते हुए।

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उज्जैन में पुलिस द्वारा 3 किलो डोडाचूरा के साथ पकड़ा गया तस्कर और जब्त बाइक

मंदसौर से उज्जैन तक डोडाचूरा तस्करी का नेटवर्क उजागर

एक साधारण डिलेवरी का इंतजार कर रहा युवक पुलिस के लिए बड़े खुलासे की कड़ी बन गया. बड़नगर पुलिस ने 3.125 किलो डोडाचूरा के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिससे अब पूरे नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद बढ़ गई है.

पुलिस के अनुसार आरोपी मौलाना ब्रिज के पास ग्राहक का इंतजार कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई. भागने की कोशिश के बावजूद घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया.

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नारी कमजोर नहीं – नारी शक्ति और आत्मसम्मान पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता

नारी कमजोर नहीं

“नारी कमजोर नहीं” एक प्रभावशाली हिंदी कविता है जो स्त्री की शक्ति, आत्मसम्मान और साहस को उजागर करती है। यह कविता समाज को चेतावनी देती है कि नारी को कमज़ोर समझना सबसे बड़ी भूल है और सम्मान ही उसके अस्तित्व का आधार है।

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नारी सम्मान और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक एक आत्मविश्वासी भारतीय महिला

“नारी की गरिमा”

“नारी की गरिमा” कविता स्त्री के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के मुद्दों पर समाज से तीखे प्रश्न करती है। यह रचना महिलाओं के प्रति भेदभाव, अपराध और सामाजिक विसंगतियों को उजागर करते हुए आत्मसम्मान और समानता की आवाज़ बुलंद करती है।

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कालरात्रि माँ

“गर्दभ वाहन पर विराजित, खड्ग-खप्परधारी कालरात्रि माँ, शत्रु का दमन करने वाली और भक्तों को समृद्धि देने वाली माता। सप्तम दिन पूजा करने से दूर होती हैं बाधाएँ, और अर्पित रक्त पुष्प व शहद से होती है शुभ फलप्राप्ति।”

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कुसुम का धागा

सुबह की चाय का कप हाथ में लिए मैं अख़बार पढ़ रही थी कि एक खबर ने जैसे दिल को भीतर तक हिला दिया इंदौर में बस में छूटा नवजात शिशु, मां-बाप फरार.
खबर छोटी थी, पर असर बड़ा. कुछ पंक्तियों में लिखी उस घटना के पीछे जाने कितनी कहानियां दबी थीं. लिखा था. एक दंपत्ति बस में सवार हुए, गोद में एक नन्हा सा बच्चा था, मुश्किल से पंद्रह दिन का. थोड़ी देर बाद वे बोले कि कुछ सामान लेना है, बस से उतर गए.

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