जिंदगी का सच
हार और जीत, सुख और दुख, प्रेम और घृणा—जिंदगी इन सभी भावों का संगम है। यह कविता जीवन के इसी सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है और हमें सिखाती है कि कर्म, सरलता और परमार्थ के मार्ग पर चलकर ही जीवन के पलों को सार्थक बनाया जा सकता है।

हार और जीत, सुख और दुख, प्रेम और घृणा—जिंदगी इन सभी भावों का संगम है। यह कविता जीवन के इसी सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है और हमें सिखाती है कि कर्म, सरलता और परमार्थ के मार्ग पर चलकर ही जीवन के पलों को सार्थक बनाया जा सकता है।
मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में होली और रंगपंचमी के अवसर पर लगने वाला डोल मेला आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का अनूठा संगम है। झरावदा, गोगापुर और कसारी जैसे गांवों में श्रद्धालु अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
“पिताजी को कैसे मनाना है” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें दोस्तों के साथ समय बिताने की इच्छा और पिता से अनुमति लेने की मासूम दुविधा को सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में व्यक्त किया गया है।
जमशेदपुर की वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार डॉ. संजुला सिंह “संजू” को नेपाल की संस्था द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा सम्मान रत्न 2026 से सम्मानित किया गया। महिला दिवस के अवसर पर उन्हें साहित्य और मातृभाषा के संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।
भारतीय संस्कृति में नारी को सदा से देवी का स्वरूप माना गया है। यह लेख नारी की शक्ति, त्याग, ममता और साहस को दर्शाता है और बताता है कि नारी कभी भी कमजोर नहीं रही। नारी सृष्टि की आधारशिला है और हर रूप में सम्माननीय है।
“मैं लिखने बैठी हूँ” एक भावनात्मक हिंदी कविता है जिसमें कवयित्री अपने मन में उमड़ते विचारों, जीवन के अनुभवों, प्रेम, प्रकृति और स्मृतियों को शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता आत्मा की आवाज़ और संवेदनाओं की गहराई को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।
“नारी दिवस की ज़रूरत नहीं” एक संवेदनशील हिंदी कविता है जो बताती है कि स्त्री को एक दिन के उत्सव से ज्यादा रोज़ मिलने वाले सम्मान, स्नेह और समझ की आवश्यकता है। छोटे-छोटे भावनात्मक क्षण ही असली महिला सशक्तिकरण का आधार हैं।
“जीत का एहसास” एक प्रेरक हिंदी कविता है जो संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की शक्ति को दर्शाती है। यह कविता बताती है कि असली जीत मंजिल नहीं बल्कि मन में बसने वाला विश्वास और प्रयास है।
“नारी कमजोर नहीं” एक प्रभावशाली हिंदी कविता है जो स्त्री की शक्ति, आत्मसम्मान और साहस को उजागर करती है। यह कविता समाज को चेतावनी देती है कि नारी को कमज़ोर समझना सबसे बड़ी भूल है और सम्मान ही उसके अस्तित्व का आधार है।
“स्वयंसिद्धा” एक प्रेरक हिंदी कविता है जो आत्मविश्वास, संघर्ष और मेहनत की शक्ति को दर्शाती है। यह कविता बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि मन में विश्वास और सपनों की रोशनी हो, तो सफलता का सूरज अवश्य उगता है।