भक्ति और श्रद्धा के सागर में डूबा नगर

नगर में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली, जब श्रीराम हनुमान मंदिर सेवा समिति के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ. बैंड-बाजों की मधुर धुन, ढोल-नगाड़ों की थाप और हरिनाम के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया. सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता, पुष्पवर्षा और श्रद्धा भाव ने इस पावन आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया. पं. सुनीलकृष्ण व्यास के ओजस्वी प्रवचनों ने कथा के प्रथम दिवस को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, जिससे नगरवासियों में शांति, भक्ति और आनंद का संचार हुआ.

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महिदपुर रोड में गुरु सप्तमी महापर्व की रहेगी धूम

महिदपुर रोड स्थित श्री स्थानीय सुविधिनाथ जैन मंदिर में गुरु सप्तमी महापर्व के अवसर पर प्रभात फेरी, भक्तांबर पाठ, गुरु इक्कीसा, गुरुपद महापूजन, महाआरती एवं भक्ति संध्या सहित विविध धार्मिक आयोजनों का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसमें महिला मंडल, बहु मंडल की सक्रिय सहभागिता रहेगी।

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महिदपुर रोड में बहेगी संगीतमयी श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा

26 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलेगा सात दिवसीय धार्मिक आयोजन सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे महिदपुर रोड- प्रस्तावित श्रीराम हनुमान मंदिर, महिदपुर रोड पर आगामी 26 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक भव्य एवं संगीत मयी श्रीमद्? भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है. कथा प्रवचन का दायित्व सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता…

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संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी का दिव्य आगमन

डॉ प्रेरणा मनाना, पूर्व निदेशक आरडी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, लेखिका स्तंभकार इंदौर- भारतीय संत परंपरा के महानतम व्यक्तित्वों में से एक, संत महामंडलेश्वर अभिराम दास जी त्यागी, बुधवार को हमारे निवास स्थान पधारे। उनके आगमन से पूरा वातावरण दिव्यता, शांतिपूर्ण ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। संत श्री अभिराम दास जी त्यागी न केवल एक…

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बिना आत्मा के शरीर बेजान

मनुष्य पूरे जीवन उस चीज़ के पीछे भागता रहता है जिसे वह मृत्यु के बाद साथ ले ही नहीं जा सकता। न शरीर उसके साथ जाता है और न ही शौहरत साथ जाता है तो केवल कर्म, जिसकी ओर वह सबसे कम ध्यान देता है। आज अधिकांश लोग अपने सुख के लिए दूसरों के अरमान कुचलने में भी हिचकते नहीं, यही विकर्म उन्हें भीतर से अशांत कर देता है। सच यह है कि बिना आत्मा के शरीर सिर्फ एक बेजान ढांचा है, और बिना शरीर के आत्मा कर्म नहीं कर सकती। शव तभी शव कहलाता है जब आत्मा देह से विदा हो चुकी हो।

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•••प्रेमानंदजी ने लुटाए आंसुओं के मोती

राधारानी के परम भक्त-वृंदावन वाले संत प्रेमानंद जी के प्रवचनों के दीवाने तो पूरे विश्व में हैं। वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम में उनके दर्शन की एक झलक पाने को ब्रह्म मुहूर्त से हजारों श्रद्धालु जुट जाते हैं। ऐसे माहौल में खुद प्रेमानंद जी इंदौर के श्रद्धालु अतुल तिवारी परिवार को मिलने का समय दिया, उनकी मंत्रमय शंख ध्वनि को एकांत में सुना और सुनते-सुनते भाव विह्वल हो गए।

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विश्वभर में मनाया गया इंटरनेशनल मीटलेस डे

साधु वासवानी की 146वीं जयंती पर करुणा और शाकाहारी संदेश का उत्सव पुणे से सुरेश परिहार की रिपोर्ट करुणा, शांति और शाकाहारी जीवनशैली के संदेश को समर्पित इंटरनेशनल मीटलेस डे इस वर्ष भी वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर मनाया गया। गुरुदेव साधु टी. एल. वासवानी की 146वीं जयंती के अवसर पर दुनियाभर में आध्यात्मिक…

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असली दीवाली: दिखावे नहीं, परिवार की खुशहाली में

डाॅ उर्मिला सिन्हा प्रसिद्ध साहित्यकार, रांची (झारखंड) दीवाली का त्यौहार आ पहुंचा।गौरी साफ-सफाई, रंग-रोगन, पूजा की तैयारी… बेटे की प्रतियोगी परीक्षा, बिटिया का फाइनल एग्जाम… बूढ़े सास-ससुर की देखभाल… पति के नखरे अलग… क्या करे, क्या छोड़ दे।सीमित आमदनी, खर्चे हजार… नाते-रिश्तेदारों का स्वागत-सत्कार। एक आम मध्यमवर्गीय, संवेदनशील परिवार की यही कहानी।खैर, काम निबटते गए……

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तेरे हवाले है सब

प्रभु, तू ही वह शक्ति है जिसने जीवन के खेल रचे। सब कुछ तेरे हवाले है — चाहे कैसे भी हो, मैं जानता हूँ कि सब तेरी योजना के तहत है।
जब भी दिल से तुझे पुकारा, तूने आवाज़ सुनी और हर मुश्किल में मुझे संभाला। तेरे दम से ही हमारे मंदिर खड़े हैं, शिवालयों की शान बनी है।
तू खुशियों के साथ दुख भी देता है, पर वही जीवन में अंधेरे में उजाले भी बन जाता है। भटकते राहों पर तूने रास्ता दिखाया, और जब हम बिखरे, तूने ही हमें फिर से जोड़कर संभाला।

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“कोमल नहीं, मजबूत है कलाई”

स्त्री केवल कोमल नहीं, बल्कि परिवार और समाज की धुरी है। संस्कार, व्रत, उपवास और साधना के माध्यम से वह न केवल अपने भीतर शक्ति और संयम विकसित करती है, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में बाँधती है। यह कविता स्त्री की आंतरिक ऊर्जा, परंपरा और सशक्तिकरण को उजागर करती है।

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